जीवनसाथी से एक-दो बार क्रूरता तलाक का आधार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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    जनगाथा । होशियारपुर।  सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जीवनसाथी के साथ एक-दो बार किया गया क्रूरता का व्यवहार, तलाक का आधार नहीं हो सकता। इसके साथ ही देश की शीर्ष अदालत ने पति को मिली तलाक की डिक्री को रद्द कर दिया और कहा कि इस आधार पर तलाक नहीं मांगा जा सकता कि दंपती में से किसी एक ने एक-दो बार साथी या उसके परिवार के प्रति क्रूरता या ऐसा व्यवहार किया हो। कोर्ट ने कहा कि अगर बार-बार क्रूरता होती है तो तलाक का आधार हो सकता है। इसके अलावा जस्टिस आरके अग्रवाल और एएम सप्रे ने पुरानी घटनाओं को तलाक का आधार न बनाए जाने की बात कही। कोर्ट ने यह फैसला दिल्ली के एक दंपती के मामले में सुनाया।

    एक दशक पहले याचिकाकर्ता संजय सिंह को ट्रायल कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर पत्नी से तलाक दिलवाया था, जिसे पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए तलाक की डिक्री की पुष्टि की, जिसे पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।शीर्ष कोर्ट ने कहा कि याचिका दाखिल करने से 8-10 साल पहले हुई घटनाओं को तलाक का आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके अलावा, क्रूरता की घटनाएं एक-दो बार नहीं, बार-बार हो रही हों तभी इसे तलाक का आधार माना जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि क्रूरता का आरोप लगने के बाद भी दंपत्ति एक साथ ही रहता था, इसका अर्थ था कि दोनों में समझौता हो गया

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