जम्मू कश्मीर में सेना के हाथ नहीं बांधने चाहिए : कमल चौधरी

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    जो लोग भारत के संविधान को मानने से इंकार कर रहे है उन्हे गिरफ्तार कर जेल में डाल देना चाहिए
    होशियारपुर, : जम्मू कश्मीर में हालात को सुधारने के लिए केंद्र सरकार को बातचीत के साथ साथ एक्शन को भी मंजूरी देनी चाहिए। उक्त बात डिफैंस कमेटी के पूर्व चेयरमैन स्कवाड्रन लीडर कमल चौधरी ने आज जारी एक बयान में कही। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के एनकाऊंटर के बाद से ही हिंसा का दौर जारी है जो थमने का नाम नहीं ले रहा। इस समय सभी राजनीतिक दल सरकार के साथ खड़े हैं। सरकार को हर उस व्यक्ति के साथ बातचीत करनी चाहिए जो भारत की भूमि पर रहता है। चाहे उसके विचार कैसे भी क्यों न हो, परंतु बातचीत भारत के संविधान के अंदर ही होनी चाहिए। जो लोग भारत के संविधान को मानने से इंकार कर रहे है उन्हे बिना किसी देरी के गिरफ्तार करके जेल में डाल देना चाहिए। जो लोग देश विरोधी नारे लगाते है उनके खिलाफ भी देश द्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। यह राजनीति का नहीं बल्कि देश की अखंडता से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा कि वहां पर शाङ्क्षत बहाली के लिए भेजी गई फोज के हाथ किसी भी सूरत में बांधे नहीं जाने चाहिए। श्री चौधरी ने कहा कि अगर आज कश्मीर में मुख्यमंत्री व मंत्री भी सुरक्षित है तो वह केवल फौज के कारण ही है । अगर वहां से फोज हटा ली गई तो फिर अलगावबादी वहां पर अपनी मर्जी से प्रदेश को चलाएंगे। उन्होंने कहा कि वहां पर फोज को खुले हाथ देने चाहिए। हम अपने सैनिकों को बिना बजह ही शहीद नहीं करवा सकते। उन्होंने कहा कि वहां पर जो लोग फौज पर पत्थर फैंक रहे हंै उन्हे भी सीमा पार से फंडिंग हो रही है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश पाकिस्तान कश्मीर में हिंसा फैला रहा है तथा यह बात अब पूरे विश्व के सामने स्पष्ट हो गई है। फौज पर पत्थर मारने वालों को किसी भी हालत में माफ नहीं करना चाहिए। श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के विपक्षी दलों के साथ मुलाकात करके साफ कर दिया है कि घाटी में शांति बहाली उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि चाहे जम्मू कश्मीर में भाजपा से गठवंधन बाली पीडीपी सरकार है परंतु पी.डी.पी. अपने वोट बैंक की खातिर असामाजिक तत्वों को सुरक्षा पहुंचाने वाली भाषा वोल रही है । जबकि भाजपा का शुरु से ही यह नजरिया रहा है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्य अंग है तथा वहां पर कानून व्यवस्था तथा शांति बहाली करना उसकी प्राथमिकता है । उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को कडे़ कदम उठाने से गुरेज नहीं करना चाहिए। अगर असामाजिक तत्व बातचीत की भाषा नहीं समझते तो फिर उनके साथ उन्ही की भाषा में बात की जानी चाहिए।
    25एचएसपी-
    कमल चौधरी

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