चरित्र जीवन का सबसे अनमोल रत्न है यदि यह सुन्दर व श्रेष्ठ होता है – साध्वी श्वेता भारती

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    चरित्र जीवन का सबसे अनमोल रत्न है यदि यह सुन्दर व श्रेष्ठ होता है – साध्वी श्वेता भारती
    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से स्थानीय आश्रम गौतम नगर में विश्व भाईचारे के संदेश को समर्पित आध्यात्मिक कार्यक्रम करवाया गया जिस में अपने विचारों को रखते हुए श्री आशुतोष जी महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री साध्वी श्वेता भारती जी ने कहा कि चरित्र जीवन का सबसे अनमोल रत्न है यदि यह सुन्दर व श्रेष्ठ होता है तो सफलता हमारे कदम चूमती है और यदि यह निकृष्ट होता है तो हमारे जीवन की बाजी हार जाते है। अमरीका के राष्ट्रपति इब्राहिम लिंकन से एक बार पूछा गया कि मानव का सबसे बड़ा गुण क्या है तब उन्होंने स्पष्ट एवं बुलंद वाणी में कहा था कि मानव का सबसे बड़ा गुण है सच्चन्निता अर्थात सुन्दर चरिन्न। परन्तु आज इंसान की हालत को देखकर लगता है कि उसका यह सर्वश्रेष्ठ गुण लुप्त हो गया है ईश्वर का अंश होते हुए भी वह निर्मलता, पानवता आदि ईश्वरीय गुणों से विहीन है कारण क्या है कारण यही है कि अपनी इच्छाओं एवं कामनाओं के वशीभूत हो गया है। ऐशो-आराम के साधन पाने की उसमें ऐसी ललक है वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार है।
    आज का इंसान बाहर से शिक्षित एंव सभ्य होकर इंजीनयर, डाक्टर आदि ऊंचे पदों पर आसीन दिखाई देता है पर भीतर से खोखला है क्योंकि वासनाओं और विकारों की आंधी उसे किसी भी दिशा में उड़ा ले जा रही है । यहां तक कि वह अपने दामन को भी दागदार कर बैठता है कुछ परिस्थिति आज भी ऐसी ही समाज में देखने को मिल रही है। साध्वी जी ने अपने विचारों में कहा कि आज व्यक्ति की दिशा सही नहीं है दिशा के अभाव के आचरण को उठाने के कितने ही प्रयास किए जाएं ज्यादातर विफ ल होंगें और यदि हम सोचे कि शिक्षाप्रद उपदेशों से मनुष्य का चरिन्न श्रेष्ठ बन सकता है तो ऐसी नहीं है । रावण चार वेदों का छ: शास्न्नों का ज्ञाता थे। क्या उसका आचरण शुद्घ था यदि होता तो सीता हरण नहीं घटता, तो फि र ऐसा क्या है जिसस चरिन्न को उत्कृष्ठ बनाया जासके । शास्न्न कहते है पहले जागरण फिर सदाचरण,जागरण से तत्पर्य परमात्मा का साक्षात्कार और यह केवल एक पूर्ण गुरू की कृ पा से ही संभव है । वे ही मनुष्य को ब्रहाज्ञान प्रदान कर सच्चे अर्थो में जाग्रत कर सकते है।

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