कैराना के मसले पर गरमाई सियासत

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    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना से हिन्दुओं के विस्थापन की खबरों से राजनीतिक तापमान बढ़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं क्योंकि भाजपा ने आज इसे लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं बताया है और वादा किया है कि इस ‘बेहद संवेदनशील मामले’ की पार्टी के एक दल द्वारा जांच किए जाने के बाद समुचित कार्रवाई की जाएगी

    उत्तर प्रदेश के कैराना से हिंदुओं के पलायन करने का मामला गरमाता जा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इस मसले को लेकर यूपी सरकार पर सवाल उठाए हैं। गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि यूपी सरकार को सोचना चाहिए कि ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई, राज्य सरकार को इस मसले पर रिपोर्ट भेजनी चाहिए।

    केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि केवल कैराना ही नहीं लोग तो यूपी ही छोड़ना चाह रहे हैं, क्योंकि यहां न तो विकास है और न ही सुरक्षा।केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि 350 परिवार गांव छोड़ कर जा चुके हैं, इसमें पुलिस की भी मिलीभगत है। प्रदेश में इस समय गुण्डाराज है।

    मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बातों को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी के सांसद ने जो लिस्ट दी है, उस पर खुद उन्हीं को विचार करना चाहिए। वहां से कोई 5 साल पहले चला गया, कोई किसी वजह से 14 साल पहले चला गया, उस के भी सपा पार्टी जिम्मेदार हैं, यह गलत है। सही रिपोर्ट जनता के सामने आनी चाहिए।

    गौरतलब है कि बीजेपी सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री हुकुम सिंह ने दावा किया कि कैराना से बड़ी संख्या में हिंदू परिवारों का पलायन हुआ है। उन्होंने 346 परिवारों की एक सूची जारी की जो 2014 से इस मुस्लिम बहुल कस्बे को छोड़कर चले गए हैं।

    इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से शिकायत पर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।

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