कश्मीर के बिगड़ते हालात

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    JANGATHA TIMES : पाकिस्तान द्वारा बार-बार गोलीबारी किए जाने से परेशान सीमावर्ती गांवों में रहने वालों में दहशत बढ़ती जा रही है। गोलाबारी में पिछले दिनों 2 भारतीयों की मौत के बाद सीमा क्षेत्र से लोगों का पलायन शुरू हो गया है।
    10 मई के बाद से बार-बार की जा रही गोलाबारी के कारण एलओसी के पास रहने वाले आम नागरिक दहशत में जी रहे हैं। दो दिनों में करीब 2 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है। एलओसी के पास झांगड़ सहित कई गांव उजाड़ नजर आ रहे हैं। यहां रहने वाले लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों का रुख कर चुके हैं। जिला प्रशासन ने लोगों को निकालने के लिए बुलेट प्रूफ गाडिय़ों का इस्तेमाल किया। राजौरी के डीसी शाहिद इकबाल चौधरी ने बताया कि झांगड़ क्षेत्र से लोगों को निकालने के लिए बसें भेजी गयीं थीं, लेकिन गोलाबारी के कारण बसें नोनियाल से आगे नहीं जा पायीं। इसके बाद बुलेट प्रूफ गाडिय़ां भेजी गयीं, जिनमें एक साथ 16 से 18 लोग बैठ सकते हैं। चौधरी ने कहा कि अधिकारियों और पुलिस ने अपनी जिंदगी दांव पर लगाते हुए गोलाबारी से प्रभावित विभिन्न गांवों से 996 लोगों को सुरक्षित निकाला और जिला प्रशासन के शिविरों में पहुंचाया। उन्होंने कहा कि अभी 3 शिविर चलाये जा रहे हैं और 28 अन्य शिविरों को अधिसूचित कर दिया गया है। एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि पाक सेना ने राजौरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास छोटे हथियारों, 82 मिमी और 120 मिमी मोर्टारों से अंधाधुंध गोलाबरी की।
    उधर आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के पूर्व कमांडर जाकिर मूसा ने एक नया ऑडियो जारी करते हुए उसके समर्थन के लिए अलकायदा की सराहना की तथा कहा कि कश्मीर में सभी आतंकी सिर्फ शरियत या शहादत व कश्मीर बनेगा दारुल इस्लाम के नारों पर ही लड़ रहे हैं। एक नई ऑडियो क्लिप में हुर्रियत नेताओं को दी धमकी पर उत्पन्न विवादों के बारे में मूसा ने कहा कि कश्मीर में लड़ाई लड़ रहे सभी आतंकी भारत या उसकी सुरक्षा एजेंसियों को उनके मतभेदों का फायदा उठाने नहीं देंगे। सभी आतंकी शरियत (इस्लामिक शासन) और शहादत में विश्वास रखते हैं। हम कश्मीर को दारुल बनाएंगे।
    जाधव मामले में भारत और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में आमने-सामने खड़े हैं। वहीं नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कश्मीर मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर भारत को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। खबर के अनुसार पत्र में कहा गया है कि नई दिल्ली कश्मीर में जनसांंख्यिकीय परिवर्तन लाने की कोशिश कर रहा है। पत्र में अनिवासी लोगों को स्थाई निवास प्रमाणपत्र जारी करने, सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों को भूमि आवंटित करने, गैर कश्मीरी लोगों को भूमि देने, कश्मीरी पंडितों के लिए अलग से टाउनशिप बनाने और पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को बसाने की बात का उल्लेख किया गया है। पत्र कहता है कि यह प्रयास कश्मीर में मुसलमानों को बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक बनाने के लिए किया जा रहा है। इस बात पर जोर दिया गया है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव लागू नहीं होने से कश्मीर में लोग गंभीर त्रासदी की ओर बढ़ रहे हैं।
    कटु सत्य यह है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लेकर आज तक दिल्ली की सत्ता में रही भारतीय सरकारों को भारत के जन का आक्रोश केवल इसी बात के लिए सहना पड़ रहा है कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में वह सब कुछ नहीं दिया जिसका आरोप पाकिस्तान लगा रहा है। अगर भारत सरकार आजादी के तत्काल बाद जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य नागरिकों को स्थाई तौर पर जमीन खरीदने व मत देने का अधिकार दे देती तो शायद कश्मीर के हालात कुछ और होते। भारत की विभिन्न सरकारों द्वारा अपनाई कमजोर नीतियों के कारण ही घाटी में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
    गृह मंत्रालय ने अपनी वैबसाइट पर हाल ही में वार्षिक आंकड़े लोड किए हैं जिनमें बताया गया कि 2015 के दौरान घुसपैठ की कोशिशों और घुसपैठ में काफी कमी आई थी मगर 2016 में इसमें अचानक तेजी आई। इसके साथ ही आतंकवादी घटनाएं भी बढ़ीं। इस अवधि में आतंकवाद की कम से कम 322 घटनाएं हुईं जबकि 2015 में यह सं�या 208 थी। 2016 के दौरान सुरक्षा बलों के जवानों के शहीद होने की संख्या में बढ़ौतरी हुई है। इस वर्ष 82 सुरक्षा बल जवान घाटी में आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए शहीद हुए। 2015 में यह संख्या मात्र 39 थी। 2016 में 150 आतंकवादी मारे गए जबकि 2015 में यह संख्या 108 थी। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर राज्य में जारी हिंसा और आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया गया। 1990 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के बाद से अब तक 13,966 लोग मारे गए जबकि 5043 सुरक्षा बल कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2016 के दौरान पाकिस्तान ने अपनी रणनीति में बदलाव किया क्योंकि घाटी के लोगों ने आतंकवादियों का मुकाबला करने की रणनीति अपनाई थी। रिपोर्ट में सीमा पार से घुसपैठ पर काबू पाने के लिए बहुआयामी रणनीति बनाई गई जिसमें सीमा के आधारभूत ढांचे को मजबूत करना भी शामिल है। राज्य में अशांत क्षेत्र में विभिन्न आतंकवादी गुटों का मुकाबला करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
    भारत सरकार द्वारा उठाए कदमों का कश्मीर घाटी में कोई सकारात्मक परिणाम आज भी दिखाई नहीं दे रहा है। इसका मूल कारण यह है कि आज अकेला पाकिस्तान ही नहीं चीन भी घाटी में अशांति फैलाने में पाक का साथ दे रहा है।
    भारत के पक्ष और विपक्ष को घाटी के बद से बदतर होते हालात को देखते हुए राजनीति से ऊपर उठकर तथा देश हित को सम्मुख रखकर संयुक्त रूप से ऐसे कदम उठाने होंगे कि घाटी के बिगड़ते हालात में सुधार आ सके।
    कश्मीर घाटी को छोड़कर शेष जम्मू-कश्मीर तो करीब-करीब सामान्य ही है। घाटी में इस्लाम के नाम पर आतंकियों को समर्थन व संरक्षण मिल रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार को राजनीतिक व आर्थिक स्तर पर ठोस कदम उठाने के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी पहल करनी चाहिए ताकि कश्मीर में रहने वालों के दिलों में जो भ्रम और भ्रांतियां हैं वह दूर हो सकें।

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