कर्नाटक के मुख्यमंत्री के क्या कहने ,पहले कौया से डरे अब लाल शाल से

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    :  कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की छवि ऐसे राजनेता की है जो अंधविश्वासों में भरोसा नहीं करते और उनकी दिशा दूसरे राजनेताओं की तरह ज्योतिषी तय नहीं करते। लेकिन मैसूर में मंगलवार को जब चामराज नगर ज़िले के कोल्लेगल से आये किसान ने उन्हें लाल रंग की एक शॉल भेंट करनी चाहि तो सिद्धारमैया ने इसे लेने से मना कर दिया और अपनी गाड़ी में बैठ गए।हालांकि यह किसान किसान लाल रंग की शॉल लेकर काफी देर तक कोशिश करता रहा, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उसे बाहर कर दिया। दरअसल कोल्लेगल, चामराजनगर में एक जगह है जो सदियों से काले जादू के लिए बदनाम है।

    सिद्धारमैया से पहले इस जगह पर कोई भी मुख्यमंत्री नहीं आया। हद तब हुई जब एक बार पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को ध्यान नहीं रहा और वे चामराजनगर के लिए निकल पड़े। आधे रास्ते में किसी ने याद दिलाया कि बीच में कोल्लेगल भी पड़ता है। फिर क्या था, उन्होंने अपनी यात्रा वहीं रोकी। हेलीकॉप्‍टर मंगाया, तब जाकर चामरानगर पहुंचे।

    हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की ऑफिसियल कार पर एक कौवा बैठा दिखा तो उनकी गाड़ी बदल गई। उस समय मीडिया में यह बात उछली कि अंधविश्वास की वजह से ऐसा किया गया। बाद में सिद्धारमैया ने सफाई दी कि गाड़ी पुरानी थी और कौवे के बैठने से पहले ही नई गाड़ी खरीदने का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका था। हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ताजा मामले में फिलहाल प्रतिक्रिया नहीं दी है कि उन्होंने कोल्लेगल के किसान से लाल शॉल लेने से इनकार क्‍यों किया। सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री के तौर पर हटाने की मांग कर्नाटक कांग्रेस के अंदर तेज़ हो रही है। शायद मुख्यमंत्री ने सोचा होगा कि समय सही नहीं चल रहा, ऐसे में विवादस्पद चीज़ों से दूर ही रहा जाये..।

     कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की छवि ऐसे राजनेता की है जो अंधविश्वासों में भरोसा नहीं करते और उनकी दिशा दूसरे राजनेताओं की तरह ज्योतिषी तय नहीं करते। लेकिन मैसूर में मंगलवार को जब चामराज नगर ज़िले के कोल्लेगल से आये किसान ने उन्हें लाल रंग की एक शॉल भेंट करनी चाहि तो सिद्धारमैया ने इसे लेने से मना कर दिया और अपनी गाड़ी में बैठ गए।

    हालांकि यह किसान किसान लाल रंग की शॉल लेकर काफी देर तक कोशिश करता रहा, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उसे बाहर कर दिया। दरअसल कोल्लेगल, चामराजनगर में एक जगह है जो सदियों से काले जादू के लिए बदनाम है।

    सिद्धारमैया से पहले इस जगह पर कोई भी मुख्यमंत्री नहीं आया। हद तब हुई जब एक बार पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को ध्यान नहीं रहा और वे चामराजनगर के लिए निकल पड़े। आधे रास्ते में किसी ने याद दिलाया कि बीच में कोल्लेगल भी पड़ता है। फिर क्या था, उन्होंने अपनी यात्रा वहीं रोकी। हेलीकॉप्‍टर मंगाया, तब जाकर चामरानगर पहुंचे।

    हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की ऑफिसियल कार पर एक कौवा बैठा दिखा तो उनकी गाड़ी बदल गई। उस समय मीडिया में यह बात उछली कि अंधविश्वास की वजह से ऐसा किया गया। बाद में सिद्धारमैया ने सफाई दी कि गाड़ी पुरानी थी और कौवे के बैठने से पहले ही नई गाड़ी खरीदने का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका था। हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ताजा मामले में फिलहाल प्रतिक्रिया नहीं दी है कि उन्होंने कोल्लेगल के किसान से लाल शॉल लेने से इनकार क्‍यों किया। सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री के तौर पर हटाने की मांग कर्नाटक कांग्रेस के अंदर तेज़ हो रही है। शायद मुख्यमंत्री ने सोचा होगा कि समय सही नहीं चल रहा, ऐसे में विवादस्पद चीज़ों से दूर ही रहा जाये..।

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