कनाडा के कट्टरपंथी सिखों का पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह को चैलेंज

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    JANGATHA TIMES : जालंधर : कनाडा में बैठे कट्टरपंथी सिख पंजाब को लगातार चुनौतियां दे रहे हैं। सूबे में कांग्रेस सरकार के गठन से तो ये गर्मख्याली सिख बिलकुल जले भुने हुए हैं। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि गर्मख्यालियों ने सीएम कैप्टन अमरेंदर सिंह को सरेआम धमकी तक दे डाली है, जिस पर पंजाब और केंद्र सरकार ने सख्त एतराज जताया है। जस्टिस फार सिख संगठन तो सीएम कैप्टन अमरेंदर सिंह से ज्यादा ही खार खाए बैठा है। इस संगठन की सरपरस्ती में सरी में पिछले दिनों आयोजित समारोह में भडकाउ भाषण देने के साथ साथ सीएम कैप्टन अमरेंदर सिंह को सरेआम धमकियां दी गई। इस पर कनाडा में भारतीय राजदूत ने वहां शिकायत दर्ज करवाई है। भारतीय हाई कमिशन ने आपनी शिकायत में 22 अप्रैल का वीडियो भी सलंग्न किया है। जिससे बैसाखी समारोह के दौरान भड़काउ भाषण और सीएम कैप्टन अमरेंदर सिंह को ओपन चैलेंज किया गया है। जस्टिन टुर्डो की हुकूमत ने इस पर जांच शुरू कर दी है।

    सूत्रों के मुताबिक सरी के गुरुद्वारा में गुजरी 22 अप्रैल को बैसाखी को लेकर दीवान सजाया गया। इस धार्मिक दीवान में सैकंड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे। इसी दौरान कट्टरपंथी सिख नेताओं ने भड़काउ भाषण देने शुरू कर दिए और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरेंदर सिंह को ओपन चैलेंज कर दिया। बता दें कि कनाडा के सिखों ने असेंबली चुनाव से पहले अकाली दल और कांग्रेस का जबरदस्त विरोध किया था। जस्टिस फार सिख संगठन ने तो सीएम कैप्टन अमरेंदर सिंह की तब कनाडा यात्रा ही कुछ मिनट पहले रद्द करवा दी थी। सरी ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत का हिस्सा है। यहां पंजाबियों की सबसे ज्यादा आबादी है। दो दशक से पंजाबी ब्रिटिश कोलंबिया में सियासत में सक्रिय हैं। कनाडा में पंजाबियों को सियासी रुतबा हासिल होने के बाद से वहां खालिस्तान व आतंकवाद का गुणगान ज्यादा ही होने लगा है।

    पंजाब असेंबली चुनाव के दौरान भी कनाडा के कई सिखों ने सूबे में अकाली दल और कांग्रेस के खिलाफ काम किया था। लेकिन पंजाब के वोटरों पर इसका कोई असर नहीं हुआ और कैप्टन अमरेंदर सिंह के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत से कांग्रेस की सरकार आसानी से सत्ता में आगई। अब कनाडा में बसे कट्टरपंथी इसे पचा नहीं रहे हैं और आए दिन पंजाब के लिए चुनौतियां पेश कर रहे हैं। कनाडा में बसे कट्टरपंथी सिखों की कार्रवाइयों का पंजाब में जबर्दस्त विरोध हो रहा है। इससे सूबे का माहौल फिर से खराब होने का डर पैदा हो गया है। पंजाब पुलिस के एक आला अधिकारी का मानना है कि फि लहाल मसले को राजनीतिक तौर पर हल करने की जरूरत है। नाम न जाहिर करने की शर्त पर उन्होंने बताया कि सूबे में फि लहाल अमन कानून की स्थिति को कोई खतरा नहीं है।

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