आनंदीबेन पटेल के उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें तेज

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    अहमदाबाद। गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के पद छोड़ने की घोषणा के एक दिन बाद इस बात को लेकर अटकलें तेज हैं कि 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। राज्य में भाजपा के समक्ष दो दशक से चले आ रहे जीत के सिलसिले को बनाए रखने की चुनौती होगी। निर्णय भाजपा नेतृत्व के ‘‘शीर्ष स्तर’’ पर लिया जाना है लेकिन आंनदीबेन के उत्तराधिकारी के रूप में जो नाम सामने आ रहे हैं उनमें कैबिनेट में ‘‘दूसरे स्थान’’ के नेता और स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल, राज्य भाजपा के अध्यक्ष विजय रूपानी, केंद्रीय मंत्री पुरूषोत्तम रूपाला और विधानसभा अध्यक्ष गणपत वसावा शामिल हैं।

    कुछ लोगों का मानना है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह राज्य की सत्ता संभालें ताकि भगवा दल को उबारा जा सके। मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार नितिन पटेल से उनकी संभावनाओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व निर्णय करेगा और हर कोई इसे स्वीकार करेगा। यह सवाल जब रूपानी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी वह उसे निभाएंगे। बहरहाल पार्टी के सूत्रों ने कहा कि इस सिलसिले में अंतिम निर्णय उच्चतम स्तर पर किया जाएगा और वर्तमान में इस पर कोई अटकल नहीं लगा सकता कि कौन पसंदीदा है। इस समय आनंदीबेन के इस्तीफे से नये मुख्यमंत्री को 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले करीब एक वर्ष से ज्यादा का समय मिलेगा। विधानसभा चुनाव 2017 के अंत में होना है। विभिन्न चुनौतियों से घिरीं आनंदीबेन ने सोमवार को पद छोड़ने की घोषणा करते हुए कहा कि समय आ गया है कि नया नेतृत्व कमान संभाले क्योंकि वह अब 75 वर्ष की होने जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने फेसबुक पर जैसे ही अपने निर्णय को सार्वजनिक किया, शाह ने नयी दिल्ली में कहा कि उनके उत्तराधिकारी का चुनाव पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा किया जाएगा जिसकी बैठक बुधवार को होगी।

    आनंदीबेन 1998 से ही भाजपा सरकार में मंत्री हैं और 2014 में मुख्यमंत्री बनीं। गुजरात में नरेन्द्र मोदी के बाद के काल में पहली बार भाजपा को विपक्षियों की तरफ से कड़ी चुनौती मिली है। आनंदीबेन को तब निराशा हाथ लगी जब दिसम्बर 2015 के नगर निकाय चुनावों में ग्रामीण इलाकों में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और विपक्षी कांग्रेस को अच्छी बढ़त हासिल हुई। उन्हें पटेल समुदाय की तरफ से आरक्षण आंदोलन का भी सामना करना पड़ा और स्थानीय निकाय के चुनावों में ग्रामीण इलाकों में भाजपा की हार का यह भी एक कारण रहा। हाल में उना में दलितों की पिटाई के बाद दलित आंदोलन से भी पार्टी की छवि को नुकसान हुआ है। आनंदीबेन के बेटी अनार पटेल के खिलाफ विपक्षी कांग्रेस द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से भी उनकी मुसीबतें बढ़ गई थीं।

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