जब कपूरथला की रानी ने कुतुबमीनार से कूदकर दे दी थी जान, अपने दो कुत्तों समेत लगाई छलांग

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होशियारपुर।जनगाथा टाइम्स। आज हम आपको ऐसी रानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने दिल्ली के कुतुब मीनार से कूदकर अपनी जान दे दी थी। कुतुब मीनार दुनियाभर में मशहूर है। देश-दुनिया के पर्यटक यहां घूमने आते हैं, लेकिन कम ही लोगों को इससे जुड़ी 75 साल पुरानी उस घटना की जानकारी है। सात दशक पहले जब कपूरथला की रानी तारा देवी ने कुतुब मीनार से कूदकर अपनी जान दे दी तो हड़कंप मच गया था। रानी ने अकेले नहीं बल्कि अपने दो पालतू कुत्तों के साथ छलांग लगाई थी।

-महाराज जगजीत सिंह से शादी करके खुश नहीं थी रानी , फ्रांस में मुलाक़ात हुयी थी और महाराज को प्यार हो गया

हैंडबैग से खुला था राज : वाकया साल 1946 का है। रानी तारा देवी अपने 2 पालतू कुत्तों को लेकर दिल्ली आई थीं। वो करीब 1 महीने दिल्ली में रहीं। एक दिन उन्होंने कुतुब मीनार घूमने का मन बनाया। 9 दिसंबर को रानी ने एक टैक्सी बुक की और अपने कुत्तों को लेकर कुतुब मीनार जा पहुंचीं। यहां उन्होंने अपना पर्स ड्राइवर को थमाया और कुत्तों को लेकर कुतुब मीनार के ऊपर जाने चली गईं। कुतुब मीनार के आखिरी छोर पर पहुंचकर उन्होंने वहां से छलांग लगा दी। उनकी मौत के बाद जब उनका बैग खौलकर देखा गया तो पता चला कि वो कपूरथला की रानी तारा देवी थीं।

पति की भी सदमे में हो गई थी मौत : रानी तारा देवी का असली नाम यूजेनिया मारिया ग्रोसुपोवै था और वो चेक गणराज्य की रहने वाली थीं। उनकी शादी कपूरथला के महाराजा जगजीत सिंह से हुई थी, वो महाराजा की छठवीं पत्नी थीं। महाराज जगजीत सिंह को रानी की मौत का गहरा सदमा लगा। वो अकेले और उदास रहने लगे। 3 साल बाद साल 1949 में उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया था।

कहा जाता है कि रानी तारा देवी और महाराज जगजीत की मुलाकात फ्रांस में हुई थी। रानी की खूबसूरती देख महाराज जगजीत को उनसे प्रेम हो गया। राजा ने उनसे शादी करने का प्रस्ताव रखा। दोनों ने साल 1942 में भारत के कपूरथला में सिख रीति-रिवाजों से शादी की थी। शादी के बाद उनका नाम यूजेनिया मारिया ग्रोसुपोवै से बदल कर रानी तारा देवी रखा गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक रानी तारा देवी इस शादी से खुश नहीं थीं। शादी के शुरुआती दिनों में दोनों के बीच सब सही था, लेकिन उम्र का अंतर होने के कारण समय के साथ दोनों के बीच दूरी पैदा होने लगी थी। कहा यह भी जाता है कि महाराजा और रानी ने साल 1945 में यानी शादी के तीन साल बाद ही तलाक ले लिया था और अलग रहने लगे थे।

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