आप भी टेंशन के शिकार हैं, तो उठते ही ट्राय करें ये उपाय

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नई दिल्ली : सुबह उठते ही चाय से लेकर नाश्ते की टेंशन। ऑफिस जाना है तो समय पर पहुंचने की टेंशन, दिनभर ऑफिस में काम की टेंशन। बिजनस है तो मंदी की टेंशन। हाउस वाइफ हैं तो गर्मियों की छुट्टी में बच्चों की धमाचौकड़ी की टेंशन। आप जितना आगे-आगे.. टेंशन उतना पीछे-पीछे। ऐसे में एक बार सुबह की शुरुआत संगीत के साथ कर के देखें, हो सकता है टेंशन को ‘परे हट’ कहने का हुनर आ जाए।

संगीत और सुकून

इतिहास की दृष्टि से देखें तो संगीत सिंधु घाटी सभ्यता काल से है, ऐसे प्रमाण मिलते हैं। वेदों में भी संगीत का उल्लेख है। यहां मुद्दा संगीत कब से है, न हो कर ये है कि जहां है, वहां सुकून है। संगीत के अलग-अलग फॉर्म हैं, किसी को क्लासिकल बहुत पसंद है, तो कोई बिलुकल नहीं सुन पाता। किसी को वेस्टर्न म्यूजिक अपनी ओर खींचता है तो कोई सूफी का दीवाना है। फंडा ये कि आपको जिस भी तरह का म्यूजिक पसंद है, उसे सुनिए। कोशिश कीजिए की सुबह उठते ही मध्यम आवाज के साथ अपने म्यूजिक सिस्टम या फोन पर संगीत बजा दें और उसके साथ अपने रोजमर्रा के कामों की शुरुआत करें। साउंड इतना तेज भी न कर दें कि कोई आवाज दे रहा हो और अपन सुन ही न पाएं। ये लो साउंड म्यूजिक पूरे दिन आपको चार्ज करने और टेंशन को दूर रखने में मदद करेगा।

हैप्पी हार्मोन्स और म्यूजिक

ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ लफ्फाजी फंडा है। समय-समय पर इसे लेकर क्लीनिकल एक्सपेरिमेंट होते रहे हैं, जिसके रिजल्ट बताते हैं कि संगीत तनाव को दूर करने में मददगार साबित होता है। मेट्रो मास हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर वीरेन्द्र मित्तल का कहना है कि सुबह उठकर अगर संगीत सुना जाए तो हमारे ब्रेन में एंडोर्फिन, डोपामिन और सिरोटीलिन नाम के हार्मोन सीक्रेट होते हैं। इन हार्मोन्स के स्त्रावित होने से हम चुस्त रहते हैं। इने हैप्पीनेस के हार्मोन से भी जाना जाता है। ये हार्मोन्स हमें खुश भी बनाए रखते हैं और काम दिल से करने की प्रेरणा देते हैं।

इंद्रियों का कनेक्शन है

वी सुपर सिंगर के विजेता और प्ले बैक सिंगर रवीन्द्र उपाध्याय पोजिटिविटी और म्यूजिक को जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि सुबह म्यूजिक सुनने का सबसे बड़ा असर तो ये होता है कि मनुष्य की सभी इंद्रियां ( senses) जो की पूरी रात की नींद के बाद सुबह-सुबह शिथिल पड़ जाती हैं, वो संगीत सुनने से जागृत होने लगती हैं और इस वजह से एक सकारात्मक भाव पैदा होता है, जो कि सारे दिन हमें ऊर्जा देती हैं।

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