जब चमकती हुई चीज को सोना समझा बैंक अधिकारियों ने , तो हुआ करोड़ों रुपये का घोटाला

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    विशेष रिपोर्ट। जनगाथा । होशियारपुर। कहते है कि हर चकमती हुई चीज सोना नहीं होती यही बात उस समय सच हो गई जब होशियारपुर के कसबे बुल्लोवाल में स्थित भारतीय स्टेट बैंक की ब्रांच में गोल्ड लोन के नाम पर गिरवी रखा गया सोना नकली निकला । बैंक में 224 लोगों ने करोड़ों रुपए का गोल्ड लोन करवाया जिसके बदले में जो सोना गिरवी रखा गया वह नकली निकला इस मामले से पर्दा उठाते हुए आरटीआइ एवरनैस फोर्म पंजाब के चेयरमैन राजीव वष्टिठ जिन्होनें होशियारपुर के बहु करोड़ी हाइवे लैंड स्कैम का खुलासा भी किया था , ने बताया कि किस तरह कुछ लोगों द्वारा नकली सोना गिरवी रख के एसबीआइ को करीब 4 करोड़ 65 लाख 73 हजार 621 रुपए का चूना लगाया गया । फिलहाल इस मामले एसबीआई बैंक ने अपने स्तर पर जांच भी शुरु कर दी है जो कि चीफ मैनेजर एडीबी ब्रांच दसूहा देव राज द्वारा की जा रही है और इसकी पुष्टि एस.के पुनिया रिजीनल मैनेजर एसबीआई द्वारा भी की जा रही है। गौरतलव है कि कर्ज लेने वाले लोगों द्वारा जो नकली सोने के गहने बैंक में गिरवी रखे गए थे जिनका वजन 15किलो 500 ग्राम के करीब था ।
    – गिरवी सोने की कीमत 18-20 प्रतिशत
    राजीव वष्टिठ के अनुसार एसबीआई ब्रांच बुल्लोवाल में अब तक कुल 290 गोल्ड लोन के केस किए गए । उन्होनें बताया कि 26 मई 2015 से ले के 5 फरवरी 2018 तक कुल 7 करोड़ 68 लाख 81 हजार 700 रुपए की राशि कर्जदारों को जारी की गई जिसका अब तक व्याज मिला के 8 करोड़ 5 लाख 37 हजार 120 रुपए 98 पैसे बन गए हैंं। इस रकम के बदले जो सोने के गहने बैंक में बतौर सिक्युर्टी रखे गए थे जब उनकी मार्च 2018 में दोबारा जांच सुनार विनोद , शीश महल बाजार होशियारपुर से करवाई गई तो बैंक अधिकारियों ,समेत सभी लोग हैरान रह गए गहनों को कीमत 3करोड़ 39 लाख 63 हजार 500 रुपए रह गई और इस तरह बैंक को 290 में से 224 शक्की खातों में से लगभग 15 किलो 500 ग्राम सोने के मुल्य में 4 करोड़ 65 लाख 73 हजार , 621 रुपए का घाटा पड़ गया । 224 शक्की खातों में पड़े सोने की गोल्ड वैल्यू 18-20 प्रतिशत ही सही पाई गई ।
    इसी को देख कर एसबीआई बैंक की कार्यप्रणाली भी पंजाब नैशनल बैंक की तरह सवालों के घेरे नजर आ रही है । क्योंकि सूत्रों का मानना है कि करोड़ों के इस घोटाले में बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है । इस मामले के बारे में जब सुनार लवली से बात की गई तो उसने बताया कि जब मैनें सोने की जांच की थी तो सोने खरा था अब बैंक अधिकारी जाने उनका काम । इसी तरह जब बैंक अधिकारियों से    बात की तो उन्होनें बताया हमें जांच के समय सुनार ने इस नकली सोने को ही असली बताया था ।
    लोग जो कर्जदार हैं उनके अनुसार जितना बैंक द्वारा हमें लोन दिया गया बताया जा रहा उतना तो हमें मिला ही नहीं हमें केवल जितनी रकम हमारी नाम पर बताई जा रही है उसका 10 प्रतिशत ही हमें मिला है उसका भी हम ब्याज 5 प्रतिशत के हिसाब से दे रहे हैं।
    राजीव वष्टिठ द्वारा खड़े किए गए सवाल –
    1. बैंक के मैनेजर व अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
    2. क्या कर्जदार लोन प्रति जानकारी थे या नहीं , वह कहीं बड़ी ठगी के शिकार तो नहीं।
    3. इस मामले में सुनार जतिंदर कुमार उर्फ लवली और फांइसर सुखविंदर पाल सिंह उर्फ सनी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिये ।
    आखीर में भारत सरकार वित्तीय मंत्रालय, भारत सरकार से मांग करते हुए वष्टिठ ने कहा कि इस छोटे से कसबे से बड़े घोटाले से शिक्षा लेने हुए बाकी बैंकों में पड़े गोल्ड लोन रुपी सोने की भी समय समय पर विभिन्न प्रकार उच्चस्तरीय सुनार से जांच होनी चाहिये इसके अलावा बैंकों द्वारा अपने पैनल में लिए जाने वाले सुनार की वित्ती व सामाजिक पक्ष को जांंंच होनी चाहिये ।

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