विदेश मंत्री जयशंकर ने श्रीलंका को संकट में सहायता का दिया आश्वासन ; ‘3.8 अरब डॉलर देने का वादा’

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नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत ने आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका की मदद के लिए 3.8 अरब अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘पड़ोस पहले’ नीति के तहत सरकार देश के पड़ोसियों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करने और उनकी मदद करने के लिए विशेष प्रयास करती है।

मंत्री ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘हमने श्रीलंका को ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ दिया है, जिसके कारण पिछले कई महीनों से भारत से आवश्यक वस्तुएं उनके पास जा रही हैं। हमने उन्हें ईंधन की खरीद के लिए भी ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ दिया है। फिलहाल, हमारा ध्यान संकट से उबरने में उनकी मदद करने पर है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस साल केवल हमने उनकी मदद के लिए उन्हें लगभग 3.8 अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। हम उनके सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। यह एक कारण है कि जिसकी मदद से वे स्थिति को और खराब होने से रोकने में सक्षम रहे हैं।’’ ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (एलओसी) एक पूर्व निर्धारित उधारी सीमा है और उधारकर्ता अपनी आवश्यकतानुसार तब तक धन ले सकता है, जब तक कि वह उधार की पहले से तय अधिकतम सीमा तक न पहुंच जाए।

रूस से तेल खरीदने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं सबसे सस्ता तेल खरीदना चाहता हूं। यह खरीद रूस से हो भी सकती है और नहीं भी। मेरी चिंता का विषय ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण यहां के लोगों की समस्या का समाधान करना है।’’ उन्होंने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर करों में कटौती की है, इसलिए राज्यों को भी इसी तरह के प्रयास करने चाहिए ताकि लोग इसका लाभ उठा सकें।

इससे पहले, केरल के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री ने तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम श्रीलंका का हमेशा से समर्थन करते रहे हैं। हम मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और हमने हमेशा ही संकट के समय उनकी बहुत मदद की है।’’

श्रीलंका में मौजूदा आर्थिक संकट के सवाल पर जयशंकर ने कहा, ‘‘वे अभी अपनी समस्याओं को कम करने के लिए कुछ कदम उठा रहे हैं, इसलिए हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा कि वे क्या करते हैं।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या कोई शरणार्थी संकट है, विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘फिलहाल अभी कोई शरणार्थी संकट नहीं है।’’

जयशंकर से संवाददाताओं ने उनके दौरे का कारण भी पूछा, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि इस दौरे के कई कारण हैं।

उन्होंने कहा कि वह यहां अपने पार्टी सहयोगियों के साथ समय बिताना चाहते हैं और समझना चाहते हैं कि वे कैसे काम कर रहे हैं तथा केरल में क्या हो रहा है। केरल में भाजपा की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा कि पार्टी की स्थिति पूरे देश में ही बेहतर है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कहीं भी कोई अपवाद नहीं है। लेकिन हम पार्टी के लिए संभावनाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम करते रहेंगे।’’

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