क्या खा रहे हैं आप???

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    भोजन में तरह-तरह की मिलावट व प्रदूषक तत्व शामिल होते जा रहे हैं। अब यह हिसाब रखना वाकई मुश्किल है कि आहार के माध्यम से हमारे शरीर में पोषण के साथ और क्या-क्या पहुंच रहा है। ऑर्गेनिक फूड एक सुरक्षित विकल्प है, पर महंगा है और सबकी पहुंच से बाहर भी।

    चाय की पत्ती में लौह कण
    जालीदार छलनी में सुखाने के बाद चाय की पत्तियों को आयरन रोलर से काटा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें चाय में लौह कण भी छूट जाते हैं। हालांकि इन्हें अलग करने के लिए चुंबक का इस्तेमाल किया जाता है, पर कुछ कण फिर भी पीछे रह जाते हैं। हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन, द फूड सेफ्टी एंड स्टैंडड्र्स ने एक किलोग्राम चाय के पैकेट में 150 एमजी आयरन सीमा निर्धारित की है। दिल्ली मैक्स हेल्थकेयर के इंटरनल मेडिसिन के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. रोमेल टिक्कू कहते हैं, ‘अधिक लौह तत्वों का होना समस्याएं पैदा कर सकता है। यह पेट संबंधी गड़बड़ी जैसी मामूली परेशानी भी हो सकती है और किसी अंग के क्षतिग्रस्त होने जितनी गंभीर और जानलेवा भी।’ महिलाओं के लिए प्रतिदिन 18 एमजी और पुरुषों के लिए 8 एमजी आयरन लेने की सलाह दी जाती है।

    चिकन में एंटीबायोटिक्स
    सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट ने हाल में दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जांच के लिए चिकन के 70 नमूने एकत्र किए थे। इन नमूनों में एंटीबायोटिक्स की मौजूदगी देखी गई। करीब 17 प्रतिशत नमूनों में एक से अधिक नशीली दवा पाई गई। उनमें टेट्रासाइक्लिन और सिप्रोफ्लोक्सेसिन जैसे एंटीबायोटिक भी थे। इनका इस्तेमाल मूत्र मार्ग, आंख, कान, रक्त, सांस से जुड़े संक्रमण, उलटी-दस्त और गंभीर रोग- जैसे निमोनिया और टीबी को ठीक करने में किया जाता है।

    दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के क्लीनिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग से जुड़े डॉ. चांद वट्टल कहते हैं कि इस तरह शरीर में अधिक एंटीबायोटिक का पहुंचना शरीर के प्रतिरोधक तंत्र को गड़बड़ा देता है। शरीर पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो जाता है, जिससे रोगों का उपचार मुश्किल हो जाता है।

    चांदी का वर्क
    चांदी का वर्क भारतीय मिठाई व मसालों जैसे इलायची व पान पर खूब लगाया जाता है। इसे बनाने के लिए चांदी को पशु आंत से बनी शीट के बीच में रखकर कूटते हुए पतली पत्ती का रूप दिया जाता है। इस साल फरवरी में एफएसएसएआई ने चांदी की पत्ती बनाने की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर पशुओं के अंगों के इस्तेमाल किए जाने पर प्रतिबंध प्रस्तावित किया है। आधुनिक मशीनों को इस्तेमाल करने की सलाह के साथ पत्ती की मोटाई और शुद्धता की सीमा भी निर्धारित की है, ताकि चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉइल की मिलावट को रोका जा सके।

    दूध में चॉक और पानी
    महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के हालिया अध्ययन के अनुसार वहां राज्य में बिकने वाला 20 प्रतिशत दूध मिलावटी है। मुंबई के हिंदुजा हेल्थकेयर सर्जिकल हॉस्पिटल के डॉ. अनिल बल्लानी के अनुसार दूध में रसायन और बैक्टीरिया दोनों तरह की मिलावट हो सकती है। कुछ दूध विक्रेता दूध में चॉक भी मिला देते हैं, जिससे उसमें कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है, जो किडनी के रोगों की आशंका को बढ़ा सकता है। अनपॉश्च्युराइज्ड दूध भी बेचा जाता है, जिसके संक्रमित होने की आशंका अधिक होती है।

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