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श्री राम कथा दौरान भगवान परशुराम सेना ने शहीद ए आजम भगत सिंह को श्रद्धाजंलि दी

श्री राम कथा दौरान भगवान परशुराम सेना ने  शहीद ए आजम भगत सिंह को श्रद्धाजंलि दी

होशियारपुर (रुपिंदर ) श्री भगवान परशुराम सेना  की तरफ से जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा की अध्यक्षता में केशो मंदिर में सात दिवसीय श्री राम कथामृत का भव्य आयोजन दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के सहयोग से किया जा रहा है। श्री राम कथा के छठे दिन मुख्य यजमान हरीश कुमार, सरोज रानी, बलवंत गुप्ता, अरविंद, राजा और प्रवीन गुप्ता थे। ज्योति प्रज्जवलित करने की रस्म जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, पूर्व विधायक गढ़शंकर लव कुमार गोल्डी, चेयरमैन एससी कमिशन पंजाब राजेश बाघा,  स्वामी सज्जानानंद जी, ब्राह्मण सभा प्रगति के एडवोकेट सुनील पराशर,कौंसलर ब्रह्म शंकर जिंपा, कौंसलर सुरेखा बरजाता, कौंसलर सुदर्शन धीर और समाज सेवक विजय अरोड़ा, परशुराम सेना प्रधान गढ़शंकर कूलभुषण शोहरी ,डा. कमल चौधरी, मंदीप शर्मा, परमजीत सिंह, राजीव शर्मा, विजय लक्ष्मी, वनीता, किशोर कुमार गायक, श्री सुरिंदर बिटन, बाह्ममण सभा प्रगति के प्रधान एडवोकेट सुनील पराशर ने निभाई।
श्री राम कथा के छठे दिन भगवान श्री परशुराम सेना की तरफ से शहीद ए आजम भगत सिंह जी के शहीदी दिवस पर उन्हें श्रद्धाजंलि दी गई। इस दौरान जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा आज के युवाओं को शहीद भगत सिंह जी से प्रेरणा लेकर देशहित के लिए कार्य करने चाहिए। इस दौरान भगवान श्री परशुराम सेना के छात्र संघ के चंदन शर्मा ने भगत सिंह जी की जीवन पर प्रकाश डाला
छठे दिन की श्री राम कथा की शुरूआत साध्वी गरिमा भारती ने सुंदरकांड प्रसंग  से की।  उन्होंने बताया कि भक्ति मार्ग पर किए जा रहे संघर्ष की चरम सीमा को भक्त हनुमान के माध्यम से प्रतिपादित किया गया है। इंसान का जीवन नदी की तरह है। उक्त नदी जिसे पता है कि मुझे सागर में मिलना है, अपने अंदर इस उमंग को लिए आगे बढती जाती है उसके मार्ग मे चट्टानें आतीे है, पत्थर आते है। अनेक रूकावटें आती है, पर नदी इन्हें तोड़ती हुई आगे बढ़ जाती है। इसी प्रकार की बाधाओं को पार किया भक्त हनुमान ने, जब वह माता सीता जी की खोज मे लंका के लिए प्रस्थान करते हैं। हनुमान जी ने मैनाक पर्वत सुरसा और सिंहिका जैसी बाधाओं को पार करते हुए लंका में प्रवेश करते हैं। यह बाहर से देखने पर सुंदर प्रतीत होती है। पर भीतर पापाचार,अनाचार,हो रहा है। साध्वी जी ने कहा कि हर मानव की यही स्थिति है। यदि आप आत्म कल्याण करवाना चाहते हैं तो अपने भीतर की बुराइयों को पापाचार को समाप्त करना होगा। और इसके लिए एक पूर्ण गुरू की शरण में जाना होगा। इसके अतिरिक्त साध्वी जी ने कहा कि जब श्री राम राज्य सिहांसन पर बैठे तो उनके राज्य में चारो ओर प्रगति सुख शांति व भाईचारा था, लेकिन आज के दौर में इसका अभाव नजर आ रहा है। रोज की तरह कथा के छठे दिवस में भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आकर कथा का रसपान किया व ब्रह्यज्ञान के संदेश को प्राप्त कर जीवन के श्रेय मार्ग को पाया।
अंत में प्रभु की पावन आरती में साध्वी रूक्मणि भारती, साध्वी राजङ्क्षवदर भारती, साध्वी शिप्रा भारती जी, साध्वी धर्मा भारती जी, कमलजीत सेतिया, सुषमा सेतिया, डा. संजीव बक्शी, प्रवीन, रोहित मरवाहा, संदीप कुमार, दीपक लोई, प्रदीप कुमार, राजु, अमन, पवन कुमार, नवीन भट्टी, नसीब चंद, हंसराज, मनी, पंकज कुमार, राकेश राय, गगन चौधरी, गुरविंदर, लवप्रीत नेगी भी मौजूद थे। श्री राम कथा के छठे दिन भी श्रद्धालुओं के लिए लंगर लगाया।

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