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आखिर क्या है पैनक्रियाज कैंसर ? जिससे लड़ते हुए जिंदगी की जंग हार गए पार्रिकर-डॉ. सुखमीत

आखिर क्या है  पैनक्रियाज कैंसर ? जिससे लड़ते हुए जिंदगी की जंग हार गए पार्रिकर-डॉ. सुखमीत

हेल्थ स्पेशल (जनगाथा टाइम्स)  गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर अब हमारे बीच में नहीं रहे। मनोहर पर्रिकर पैनक्रियाज कैंसर से पीड़ित थे और इससे लड़ते हुए वो रविवार शाम जिंदगी की जंग हार गए। जानकारी के मुताबिक मनोहर पर्रिकर और उनके डॉक्टरों को इस बीमारी का पता 18 मार्च 2018 चला था। और इसके ठीक एक साल बाद यानी 17 मार्च 2018 को उन्होंने आखिरी सांस ली। बताया जा रहा है कि शुरुआत में मनोहर पर्रिकर को पेट में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्होंने डॉक्टरों की मदद ली और तब उन्हें इस बीमारी के बारे में पता चला।
मेडिकल साइंस में इस बीमारी को ‘मूक कैंसर’ भी कहा जाता है। इस बीमारी के लक्षण शरीर में मौजूद तो होते हैं लेकिन आसानी से नजर नहीं आते। इस बीमारी के ट्यूमर शुरुआती स्तर पर डॉक्टरों की पकड़ में नहीं आते हैं, जब तक ये बीमारी शरीर के दूसरे हिस्सों में ना पहुंच जाए तबतक लोगों को कुछ महसूस भी नहीं होता है। हालांकि इस बीमारी के कुछ खास लक्षण भी हैं। मसलन- पेट के ऊपरी भाग में दर्द, कमजोरी महसूस होना, वजन घटना, स्किन, आंख और यूरिन का रंग पीला हो जाना, भूख न लगना, जी मिलचाना।
आपको बता दें कि पैंक्रियाज यानी अग्नाशय हमारे पाचन तंत्र का अहम हिस्सा है। यहा मछली के आकार के जैसा होता है। इसकी लंबाई तकरीबन 6 इंच होती है। यहा छोटी आंत, लिवर और स्प्लीन से घिरा रहता है। इसका अगला हिस्सा बड़ा और पिछला हिस्सा छोटा होता है। यह हमारे खाने को ऊर्जा में बदलता है और दूसरे सेल्स में इसे भेजता है। इस अंग की सेहत खराब होने का मतलब है शरीर को मिलने वाले ऊर्जा के पूरे सिस्टम का ही बिगड़ जाना। पैनक्रियाज में परेशानी का असर पाचन संबंधी समस्या के रूप में सामने आता है। इसके अलावा गंभीर स्थिति होने पर मधुमेह, अग्नाशशय का कैंसर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। पैनक्रियाज के लिए सबसे खतरनाक कैंसर की बीमारी होती है।

महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में पैन्क्रियाटिक कैंसर की संभावना ज्यादा होती है। आम तौर पर देखा जाता है कि पुरुष धूम्रपान ज्यादा करते हैं, इस कारण उनके इस रोग के चपेट में आने की संभावना ज्यादा होती है। धूम्रपान करने वालों में अग्‍नाशय कैंसर के होने का खतरा सामान्य व्यक्ति के मुकाबले दो से तीन गुणा ज्यादा होता है। डॉक्टरों के मुताबिक रेड मीट और चर्बी युक्‍त आहार के सेवन करने वालों को इस बीमारी का ज्याद खतरा रहता है। प्रचुर मात्रा में फल और सब्जियों के सेवन से इस बीमारी के होने की आशंका कम रहती है। आपको बता दें कि पैनक्रियाज के लिए ताजे फलों का रस और हरी सब्जियां काफी फायदेमंद माना जाता है। पैनक्रियाज यानी अग्नाशय के लिए ब्रोकर्ली को अच्छा माना जाता है। ब्रोकली में मौजूद फायटोकेमिकल, कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने में मदद मिलती है। ब्रोकली एंटी ऑक्सीडेंट का भी काम करते हैं और खून को साफ रखने में मदद करता है। इसके अलावा ग्रीन टी, लहसून, सोयाबीन और एलोवेरा का भी सेवन भी इस बीमारी में काफी लाभदायक है।

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