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केडी भंडारी का विरोध तेज, प्रदेश भाजपा प्रथान के फैसले का विरोध कर फंसे

केडी भंडारी का विरोध तेज, प्रदेश भाजपा प्रथान के फैसले का विरोध कर फंसे

जालंधर (जनगाथा टाइम्स ) तेजतर्रार युवा नेता किशन लाल शर्मा की भारतीय जनता पार्टी में वापसी पर पूर्व विधायक केडी भंडारी आग बबूला हो उठे हैं| अपनी सियासी जमीन खिसकती देखकर भंडारी के होश फाख्ता हो गए हैं और वह खुलेआम पंजाब भाजपा प्रधान श्वेत मलिक के फैसले का विरोध करने पर उतारू हो गए हैं| विरोध करने वाले केडी भंडारी यह भूल गए हैं कि खुद उन पर पार्टी विरोधी होने और कांग्रेस नेताओं का चुनाव में समर्थन करने का आरोप लगाते हुए उनके ही वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने हाईकमान को शिकायत देते हुए उन्हें पार्टी से बर्खास्त करने की मांग की थी| फिलहाल यह शिकायत आलाकमान के पास पेंडिंग पड़ी हुई है| ऐसे में पार्टी प्रधान श्वेत मलिक का खुला विरोध करने वाले केडी भंडारी को पार्टी से बर्खास्त करने की मांग एक बार फिर मुखर हो गई है|
दरअसल, किशन लाल शर्मा का परिवार शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी समर्थक रहा है| उनके ताया मदनलाल पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता थे| यही वजह थी कि बाल्य काल से ही किशन लाल शर्मा का झुकाव भगवा दल की ओर था| तेजतर्रार नेता होने के चलते उन्हें पार्टी ने युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष भी बनाया था| कम उम्र में यह पद हासिल करने के बाद किशन लाल शर्मा पार्टी के ही कुछ आला नेताओं की आंखों की किरकिरी बन गए| यही वजह रही कि उन्हें सियासत का मोहरा बनाकर मनोरंजन कालिया के खिलाफ बयानबाजी करने के आरोप में पार्टी से तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया गया| उन्हें अपनी गलती स्वीकारने का मौका तक नहीं दिया गया था| किशन लाल शर्मा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी के कुछ आला नेताओं को यह बात खटक ने लगी थी कि अगर किशन लाल शर्मा भारतीय जनता पार्टी की ओर से राजनीति में सक्रिय रहते हैं तो आने वाले समय में वह विधायक के उम्मीदवार हो सकते हैं| अगर ऐसा होता तो इसका सीधा खामियाजा पूर्व विधायक केडी भंडारी को भुगतना पड़ता क्योंकि किशन लाल शर्मा का वर्चस्व क्षेत्र नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र ही है|

इसका ताजा उदाहरण केडी भंडारी की जीत के रूप में ही देखा जा सकता है| जब तक किशन लाल शर्मा भारतीय जनता पार्टी के साथ थे तब केडी भंडारी नॉर्थ विधानसभा सीट से विधायक बने लेकिन जब किशन लाल शर्मा पार्टी से बाहर हो गए तो केडी भंडारी भी विधानसभा की सीढ़ियां नहीं चढ़ पाए| इतना ही नहीं किशन लाल शर्मा एकमात्र ऐसी पार्टी के नेता हैं जिन्होंने उस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की जिस समारोह में दबंग नेता एवं पूर्व मंत्री अवतार हेनरी मुख्य अतिथि थे| हेनरी के सामने मंच पर यह हिम्मत जुटाने वाला फिलहाल कोई नेता जालंधर में नहीं था| किशन लाल शर्मा की वापसी से निश्चित तौर पर नॉर्थ विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है| ऐसे में केडी भंडारी का सिंहासन डोलता नजर आ रहा है| कया सी भी लगाए जा रहे हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में केडी भंडारी का पत्ता साफ हो सकता है और पार्टी की ओर से इस विधानसभा से टिकट किसी साफ सुथरी छवि वाले नेता को दी जा सकती है|
इस संबंध में भाजपा स्टेट वर्किंग कमेटी के सदस्य रवि महेंद्रू और वरिष्ठ भाजपा नेता गोपाल गुप्ता पेठे वाले कहते हैं कि केडी भंडारी ने खुलेआम उनका विरोध किया और विरोधी उम्मीदवारों का नगर निगम चुनाव में साथ दिया जिसके चलते पार्टी उम्मीदवारों को हाल का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शीतला माता मंदिर में बैठक भी हुई थी और उन्होंने 9 उम्मीदवारों के साथ पूल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को लिखित में शिकायत भी दी थी और केडी भंडारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर उन्हें पार्टी से बर्खास्त करने की मांग भी की थी लेकिन अभी तक यह मांग पेंटिंग पड़ी हुई है| किशन लाल शर्मा की वापसी पर केडी भंडारी के खुलेआम विरोध के संबंध में पूछे जाने पर रवि महेंद्रू कहते हैं कि अगर किसी की पार्टी में वापसी की जानी है तो सभी लोगों से सलाह मशविरा करने के बाद ही वापसी की जानी चाहिए थी लेकिन अगर पंजाब प्रधान ने कोई फैसला लिया है तो उस फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए ना की खुलेआम अखबारों और पत्रिकाओं में बयानबाजी करके पार्टी की छवि को खराब किया जाए| अगर कोई मनमुटाव है तो उसे बंद कमरे में बैठकर दूर किया जा सकता है लेकिन इस तरह से बवाल काटना पूरी तरह से अनुशासनहीनता है और ऐसे करने वाले को पार्टी से तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए| गोपाल गुप्ता कहते हैं कि केडी भंडारी ने कभी कार्यकर्ताओं का ख्याल नहीं किया और आज पार्टी का अनुशासन भंग कर रहे हैं| वह भाजपा जिला प्रधान से इस्तीफा मांगने की तैयारी कर रहे हैं और पार्टी के कार्यकर्ताओं को बुलाकर उन्हें प्रदेश प्रधान जिला प्रधान और हाईकमान के खिलाफ भड़काया जा रहा है| यह सब ऐसे समय में किया जा रहा है जबकि लोकसभा चुनाव सिर पर हैं| ऐसा करके केडी भंडारी सीधे तौर पर कांग्रेस को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और केडी भंडारी को तत्काल पार्टी से निकाल दिया जाना चाहिए| बता दें कि किशन लाल शर्मा की भाजपा में वापसी के बाद केडी भंडारी ने फेसबुक पर पोस्ट करके कहा है कि हमें यह मंजूर नहीं है| इसके बाद भाजपा की सियासत गरमा गई है| केडी भंडारी के विरोध से यह साफ जाहिर होता है कि किशन लाल शर्मा का शहर में इतना बड़ा वजूद और इतनी अच्छी पकड़ है कि वह भंडारी के लिए नुकसानदायक हो सकती है| ऐसे में भंडारी का सियासी भविष्य भी दांव पर लग सकता है| अब देखना यह है कि पार्टी प्रधान इस अनुशासनहीनता पर केडी भंडारी के खिलाफ कोई कार्रवाई करते हैं या नहीं| इस संबंध में जब किशन लाल शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मुझे भारतीय जनता पार्टी और संघ की सेवा करने का दायित्व विरासत में मिला है| हम 3 पीढ़ियों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे| इस संबंध में जब केडी भंडारी से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल नॉट रिचेेबल आया।

सूत्र बताते हैं कि भंडारी के इस रवैये से हो रही पार्टी की फजीहत के बाद पंजाब भाजपा के प्रधान व पार्टी हाईकमान भी खफा हैं. चूंकि गत विस चुनाव में भंडारी हैनरी से रिकॉर्ड मतों से हारे थे इसलिए उनके निष्कासन का कोई खास असर पार्टी को नजर नहीं आ रहा. ऐसे में उन्हें पार्टी से भले ही न निकाला जाये लेकिन अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूर तय मानी जा रही है.

इस संबंध में जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्वेत मलिक से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला| इसके बाद प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष मोहिंदर भगत से बात की गई तो उन्होंने केडी भंडारी के इस तरीके को गलत बताया| साथ ही उन्होंने यह कहा कि कुछ गिले-शिकवे होते हैं और हम उसे ठीक करेंगे| आज केडी भंडारी जिला अध्यक्ष से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब गिला शिकवा होता है तो थोड़ा रोष तो होता ही है लेकिन रोष व्यक्त करने का यह तरीका सही नहीं है|

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