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सतगुरु माता सुदीक्षा जी का संदेश केवल तन ही नहीं मन का भी सत्संग में होना जरूरी : महात्मा सुरिंदर सोखी

सतगुरु माता सुदीक्षा जी का संदेश केवल तन ही नहीं मन का भी सत्संग में होना जरूरी : महात्मा सुरिंदर सोखी

 

होशियारपुर (मनप्रीत मन्ना ): सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की कृपा से मुखी बहन सुभदरा देवी के नेतृत्व में संत समागम का आयोजन किया गया। इस मौके पर जोनल टूर के अनुसार तलवाड़ा के संयोजक महात्मा सुरिंदर सिंह सोखी विशेष तौर पर पहुंचे तथा उनके साथ बहन चरणजीत कौर व महात्मा गुरदयाल सिंह साथ थे। उन्होंने प्रवचन करते हुए कि गुरसिख अपने आप को गुरमत के अनुसार चलाता है। वो अपने गुरु के द्वारा दिए ज्ञान पर विश्वास रखता है। उसका जीवन इस ज्ञान के कारण सहज जीवन होता है। वह ऊच नीच लाभ हानि, मान अपमान से ऊपर उठकर गुरु के आदेशों को पहल देता है। वह शिकवा नहीं शुक्राना करता है। उसके जीवन का आधार यह निरंकार होता है। इस निरंकार से बड़ी दुनिया में कोई ओर शक्ति नहीं है। गुरसिख हमेशा अपने जीवन सत्संग सेवा सिमरन को पहल देता है। गुरु के वचनों को मानते हुए अपने मन को दुनियावी वस्तुओं से ऊपर उठा कर इस निरंकार से जुड़े रहने की उसकी चाहना होती है। उन्होंने फरमाया कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी फरमाते है कि जब हम सत्संग में बैठे तो केवल तन ही नहीं हमारा मन भी सत्संग में शामिल होना चाहिए, अगर हमारा मन सत्संग में होगा तब ही हम महापुरुषों के वचनों को सुनकर समझ पाएंगे। हमारे कारण सत्संग में किसी का ध्यान टूटना नहीं चाहिए अगर हमारे किसी कार्य करके किसी ओर महात्मा का ध्यान टूटता है तो यह एक गुनाह है। उन्होंने फरमाया कि जब भी सत्संग का समय होता है तो वो सारे काम छोड़ के अपने मन को सत्संग की ओर समर्पित कर देता है और उसकी यही कोशिश रहती है कि समय सिर सत्संग आ के महापुरुषों के अनमोल वचनों को सुनकर मैं अपने जीवन का कल्याण करू। आज सतगुरु माता सुदीक्षा जी यही फरमा रहे है कि हम ज्यादा से ज्यादा सत्संग सेवा सिमरन करे और इस जीवन के अनमोल स्वासों को अपने दूसरे के कल्याण की ओर लिजाए और हमारा जीवन मिशन की पहचान बन जाए और ये तभी हो सकता है अगर हमने इस ब्रह्म ज्ञान को ओर निरंकार को अपने जीवन का आधार बनाया हो। अंत में मुखी बहन सुभदरा जी ने संयोजक महात्मा सुरिंदर सिंह सोखी व आई हुई संगत का धन्यवाद किया। इस अवसर पर संचालक बाल किशन, शिक्षक देविंदर बोहरा बोबी, निर्मल दास पटवारी, योगराज पटवारी, बहन सुशील व गुणवंत कपूर, अमित धवन, सुखदेव राज, बख्शी सिंह, पंकज कुमार आदि उपस्थित थे।

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