Select Page

मानव का जीवन एक संघर्ष का क्षेत्र है- शिप्रा भारती

मानव का जीवन एक संघर्ष का क्षेत्र है- शिप्रा भारती

होशियारपुर(शाम शर्मा) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के स्थानीय आश्रम गौतम नगर में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । जिसमें अपने विचारों को रखते हुए संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री गुरू आशुतोष महाराज जी के परम शिष्या साध्वी सुश्री शिप्रा भारती जी ने उपस्थित प्रभु प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि मानव का जीवन एक संघर्ष का क्षेत्र है। एक प्रकार से युद्ध का मैदान है। जिसमें वासनाएँ,कुविचार,राग-द्वेष आदि हमारे परमशत्रु हैं। हमें सद्मार्ग से हटाने का प्रयास करते रहते है। अत एक सच्चा जीवन जीने के लिए हमें इनके साथ युद्ध करना होता है। जिस प्रकार एक योद्धा जब युद्ध के मैदान में जाता है तो हमेशा अपने अस्त्र-शस्त्र तैयार करके ही जाता है। हमनें अपने प्राचीन काल के योद्धाओं के चित्र तो अवश्य ही देखें होगे। उनके हाथ में धनुष-बाण तो होता ही है और तलवार के साथ ढाल भी हुआ करती है। ढाल जो एक योद्धा की हमेंशा रक्षा करती है। यह ढाल हम तभी प्रयोग में ला सकते है यदि हमारे अन्त: करण में ईश्वर के प्रति वैराग्य और प्रेम के भाव होगे 1योंकि यदि हमारे मन में प्रभु के लिए वैराग्य नही है तो हम विष्य वासनाओं में ही अपने जीवन का निरवाह करते रहते है और क5ाी परमात्मा की ओर बढ़ ही नही पाते।

साध्वी जी ने अपने विचारों में आगे बताया कि प्रश्न ही यही पैदा होता है कि प्रभु के प्रति हमारे भीतर वैराग्य उत्पंन कैसे हो? क्योंकि आज मानव अपनें जीवन को संसारिक दौड ही लगा रहा है जिसमें उसे अपने आप का भी भान नही है। ईश्वर के प्रति ऋद्धा,प्रेम,त्याग,वैराग्य तो केवल तभी संभव होगा यदि हमारे जीवन में एक संत आएगे जो स्वयं प्रभु से प्रेम एवं वैराग्य से जुडे होगे और हमें भी प्रभु का दर्शन हमारे अन्तकरण में करवा देगे। तभी हमारें भीतर प्रभु को पाने की चाहत बढेगी 1योकि किसी को बिना देखें आप उसके लिए तडप पैदा नही हो सकती। इसी प्रकार प्रभु का दीदार पाकर ही हमारेें भीतर वैराग्य उत्पंन हो सकता है। इस शुभ अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुँचे।

About The Author

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *