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मिड डे मील के अंतर्गत बच्चों को डाइनिंग टेबल पर परोसा जाता है खाना

होशियारपुर (रुपिंदर ) सरकारी स्कूलों में व्यवस्था को बहाल रखने के लिए जिले के कई स्कूल काम कर रहे हैं लेकिन सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल सांधरा इन सब स्कूलों के लिए उदाहरण बन गया है। स्कूल में सभी बच्चे पूरी ड्रेस में आते हैं और प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सभी बच्चों ने आई.कार्ड लगाया होता है। स्कूल में पढ़ाई तो असरदार है ही साथ में व्यवस्था भी बेमीसाल है। यही कारण है कि यह जिले का पहला ऐसा सरकारी स्कूल था जहां सबसे पहले मिड डे मील डाइनिंग टेबल पर शुरु  हुआ। धीरे-धीरे जिले के कई ऐसे स्कूल है जिन्होंने स्कूल की इस व्यवस्था से सीख लेते हुए अपने स्कूलों में भी डाइनिंग टेबल पर मिड डे मील देना शुरु  किया। यह बात इस ओर इशारा करती है कि जिले के अन्य स्कूल भी स्कूलों में अच्छी व्यवस्था लागू करने के लिए तत्पर रहते हैं। इस स्कूल में ऐसी ही अन्य कई व्यवस्थाएं है जो इसे बाकी स्कूलों से अलग करती है और यह सब स्कूल के प्रिंसिपल तेजिंदर कुमार की मेहनत का ही फल है। वे न सिर्फ स्कूल के विकास के लिए काम कर रहे हैं बल्कि अपनी जेब से भी पैसा खर्च कर बच्चों को प्रोत्साहित करने में कोई कमी नहीं छोड़ते।  प्रिंसिपल तेजिंदर कुमार हर वर्ष अपनी तरफ से बारहवीं के पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर आने वाले विद्यार्थियों को 11 हजार रु पये नकद पुुरु स्कार के तौर पर देते हैं।
         डिप्टी कमिश्रर श्रीमती ईशा कालिया ने प्रिंसिपल व स्कूल स्टाफ की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे अध्यापकों के कारण ही सरकारी स्कूलों में एक अच्छा सिस्टम पैदा हो रहा है, जिस कारण विद्यार्थियों को एक बढिय़ा माहौल में मानक शिक्षा मिल रही है। उन्होंने बाकी स्कूलों को भी सरकारी स्कूलों का स्तर और ऊंचा उठाने के लिए सांधरा स्कूल को रोल माडल बनाकर जी-तोड़ यत्न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अध्यापक का विद्यार्थी के जीवन में बहुत बड़ा योगदान होता है और अध्यापक की बदौलत ही विद्यार्थी को दिशा मिलती है, इस लिए सरकारी स्कूलों में समूह स्टाफ एकजुटता के साथ काम करें, ताकि सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को प्रोत्साहित करने के लिए वे अच्छी कारगुजारी वाले स्कूलों का जल्द ही खुद दौरा करेंगी।
        प्रिंसिपल तेजिंदर कुमार ने कहा कि स्कूल में जो विकास हो रहा है वह टीम वर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्कूल स्टाफ की ओर से जहां स्कूल के विकास में योगदान डाला जा रहा है, वहीं जरु रतमंद विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं भी मुहैया करवाई जा रही है। इसके अलावा अध्यापक मेहनत के कारण ही स्कूल का नतीजा शत प्रतिशत रहता है। उन्होंने निर्णय किया है कि वे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले अपने फंड का एक चौथाई हिस्सा इस स्कूल को देंगे और ट्रस्ट बनाकर दानी लोगों क ी मदद से इसमें ज्यादा से ज्यादा पैसा जमा करवाया जाएगा जिससे मिलने वाले ब्याज से स्कूल के विद्यार्थियों की फीस भरी जाए और ट्रस्ट का पूरा पैसा स्कूल के विकास पर खर्च किया जाए। उन्होंने कहा कि स्कूल की वेलफेयर कमेटी बनाई गई है और यह कमेटी लोगों के सहयोग से स्कूल के विकास में साढ़े छह लाख रु पये लगा चुकी हैं।
          स्कूल की छात्राओं के लिए विशेष प्रयास करते हुए  उन्होंने स्कूल में एक सैनेटरी नैपकिन वंैडिंग मशीन भी लगाई है और उसको जलाने के लिए इनसीनेटर की भी व्यवस्था की गई है जो कि छात्राओं के लिए काफी मददगार साबित हुआ है। इसके अलावा स्कूल में ई लैब विशेष तौर पर सुसज्जित है जिसमें प्रिंसिपल तेजिंदर सिंह की ओर से एयर कंडिशनर भी लगाया गया है। स्कूल में आर्ट एंड क्राफ्ट लैब को अत्याधुनिक बनाने पर काम चल रहा है। स्कूल में प्रिंसिपल तेजिंदर की ओर से अपने स्तर पर बुक बैंक शुरु  करने की योजना पर काम चल रहा है, जहां बच्चों को कोर्स से लेकर प्रतियोगी परीक्षा के लिए किताबें पढऩे को मिल सकेंगी। प्रिंसिपल तेजिंदर ने कहा कि इस वर्ष उनकी योजना में स्कूल में स्पोर्टस रु म बनाना है।

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