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कंडी नहर अपग्रेडेशन और देखरेख में धांधली , ठेकेदार ले डूबा डिविजनल अकाऊंट अफसर को

कंडी नहर अपग्रेडेशन और देखरेख में धांधली , ठेकेदार  ले डूबा डिविजनल अकाऊंट अफसर को

राजेंद्र मैडी / होशियारपुर : बेशक विजिलेंस ब्यूरो ने ठेकेदार गुरिन्दर सिंह के खिलाफ अनियमितताएं बरते जाने के कई केस दर्ज किए हैं लेकिन कई मामले तो ऐसे हैं जोकि सबको हैरान करते हैं। इन्हीं में से एक मामला कंडी नहर स्टेज -1 की 18300 मीटर अपग्रेडेशन और देखरेख का है। इस मामले में तो मार्च में ही पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने ठेकेदार गुरिन्दर सिंह समेत 7 आधिकारियों के खिलाफ पुलिस स्टेशन विजिलैंस ब्यूरो फेज -1 मोहाली में मामला दर्ज किया है।
विजीलैंस ब्यूरो की तरफ से दर्ज किए गए इस मामलो में जिन 7 आधिकारियों के नाम शामिल हैं, उनमें से एक नाम डिविजनल अकाऊंट अफसर मनिन्दर सिंह (केंद्रीय अधिकारी) का है। मनिंदर सिंह पंजाब की तरफ से शाह नहर के दफ्तर में नहर के करवाए काम के कुछ समय दौरान तैनात रहे थे। मनिंदर द्वारा केवल 2 अदायगियों में लगे रेट और टैक्स आदि के आंकड़ों को चेक किया गया था जबकि ठेकेदार गुरिन्दर सिंह को उक्त काम के लिए 5 बार भुगतान किया गया। विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से दर्ज किए गए इस मामले पर सवाल उठाते हुए आर.टी.आई. अवेयरनेस फोरम पंजाब के चेयरमैन राजीव वशिष्ठ ने आशंका जताई है कि केंद्र सरकार के अधिकारी मनिन्दर सिंह को कथित तौर पर फंसाने की कोशिश की जा रही है जिससे नहर विभाग के कुछ बड़े अफसरों को बचाया जा सके।

प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही शुरू हो गई गड़बड़ी
इस प्रोजैक्ट की शुरुआत में ही गड़बड़ हुई जिसमें 8 करोड़ 29 लाख 29 हजार 11 रुपए के तय किए काम की अनुमान राशि बढ़ाकर 14 करोड़ 58 लाख 45 हजार 990 रुपए कर दिया गया। इसमें मंडल लेखाकार की कोई भूमिका नहीं होती। विजिलेंस विभाग के अनुसार इस काम में 4 करोड़ 60 लाख 56 हजार 399 रुपए की धांधली हुई है, जिसमें से 2 करोड़ 1 लाख 60 हज़ार 478 रुपए की अदायगी गुरिन्दर सिंह ठेकेदार को माप पुस्तक (एम.बी.) में बिना किसी एंट्री से की गई है। इसके इलावा 2 करोड़ 58 लाख रुपए 95 हज़ार 921 रुपए की अदायगी भी की गई, जिसकी माप बुक में एंट्री तो है लेकिन वह भी शक के दायरे में है। वशिष्ठ ने कहा कि जिस लेखाकार को विजीलैंस ब्यूरो की तरफ से मुलजिम बनाया गया है, उसकी तरफ से सिर्फ 2 भुगतानों के समय जे.ई., एस.डी.ओ. व एक्सियन की तरफ से चैक हुए काम का बिल रेटों और मात्रा के साथ सिफऱ् अर्थमैटीकल चैक किया गया था, इस हालत में अकाऊंटेंट कैसे गड़बड़ कर सकता है। उन्होंने बताया कि ठेकेदार की तरफ से करवाए काम की गुणवता को चेक करना नहरी विभाग के जे.ई., एस.डी.यो. और एक्सियन का काम था फिर इस हालत में अकाऊंटेंट को मुलजिम कैसे बनाया गया यह भी जांच का विषय है। गौरतलब है कि ठेकेदार गुरिन्दर सिंह को की गई कुल 5 अदायगियां बीच में से चौथी और पांचवी अदायगी के समय मनिन्दर सिंह कभी तैनात ही नहीं रहा।

कैसे हुई ठेकेदार को अदायगी
इस प्रोजैक्ट में ठेकेदार गुरिन्दर सिंह को 5 बार भुगतान किया गया। इस पर राजीव विशिष्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि ठेकेदार को पहली अदायगी करते समय नहरी विभाग के 6 जे.ई, एस.डी.ओ. और एक्सियन ने अपने स्तर पर बिल पास कर दिया जो कि 2 करोड़ 91 लाख 49 हज़ार 755 रुपए का था। इसके बाद पास हुए दूसरे और तीसरे बिल को नहरी विभाग के ऊपरी आधिकारियों की तरफ से तैयार करवाया गया और अर्थमैटीकल चैक के लिए अकाऊंटैंट मनिन्दर सिंह के पास भेजे गए, जो अर्थमैटीकल चैक करके बिल वापिस एक्सियन नहरी विभाग को भेज दिए गए। इसके बाद के पास हुए चौथे और पांचवे फाइनल बिल दूसरी डिवीजन में पास हुए जहां केंद्रीय अकाऊंटैंट की पोस्ट नहीं थी, उक्त बिल इनटैनसिव इन्वेस्टिगेशन में  पास हुए, जहां पी.डब्ल्यू.डी. के निजी मुलाजिमों ने ऑडिट जनरल पंजाब की भूमिका निभाते हुए बिलों का अर्थमैटीकल चैक किया। गौरतलब है कि मंडल अकाऊंटैंट की जिम्मेदारी सिर्फ उसके पास आए बिलों में दिखाई रकम की कैलकुलेशन, बजट और टैक्स आदि को चैक करना है न कि करवाए गए काम की गुणवता को चैक करना। इस संबंध में जब विजिलेंस अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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