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डॉ. सुखमीत ने जैनडे बोर्डिंग स्कूल की छात्राओं को किशोरावस्था दौरान होने वाले बदलावों के बारे जानकारी दी

डॉ. सुखमीत ने जैनडे बोर्डिंग स्कूल की छात्राओं को किशोरावस्था दौरान होने वाले बदलावों के बारे जानकारी दी

जनगाथा ,होशियारपुर। यौवन में लडक़ी बाल अवस्था से यौवनवास्थ में प्रवेश करती है। एेसे में प्राकृतिक रूप से उसके शरीर को कई परिवर्तनों का सामना करता है। यौवनावस्था के दौरान लडक़ी को कई प्रकार के शारीरिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। सब कुछ बदल जाता है, आपका शरीर, आपका मूड, लेकिन आखिर इन बदलावों के पीछे वजह क्या होती है। हर कोई यौवन के बारे में बात करता है लेकिन आज भी समाज में खुल कर इस संबंधी कोई बाद नहीं करता। लेकिन यह सब शारीरिक हार्मोंस के बदलाव के चलते होता है यही एक मात्र सच है।

शारीरिक परिवर्तनों के चलते लड़कियों को हाईजिनिक रहना जरूरी : डा. सुखप्रीत बेदी
-एसएवी जैन डे बोर्डिंग स्कूल में इस संबंधी सेमिनार आयोजित

इन शारीरिक परिवर्तनों के चलते एसएवी जैन डे बोर्डिंग स्कूल में शिक्षा निधी के प्रधान यशपाल जैन के दिशा निर्देशानुसार स्कूल की डीन सुनीता दुग्गल व प्रिंसीपल सुषमा बाली की अध्यक्षता में एक सैमीनार का आयोजन किया गया जिसमें डा. सुखमीत बेदी ने स्कूल की 6वीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा की कन्याओं को अपने शरीर में आने वाले बदलाव और सावधानियों संबंधी जागरूक किया। उन्होंने बताया कि कैसे आखिर यौवन आपके शरीर में बदलाव का कारण बनता है। जिसमें मु य रूप से लड़कियों के शरीर का बदलाव 8 से 13 वर्ष की आयु में प्रारंभ होता है और यह पूरी यौवनावस्था में चलता रहता है। कद में इजाफा साढ़े नौ दस वर्ष की आयु में शुरू होता है। वहीं, पहली माहवारी भी 8 से लेकर साढ़े 16 वर्ष की आयु में होती है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को अपनी माहामारी के दौरान अपने आप को साफ सुथरा रखना चाहिए क्योंकि पुरानी धारणा थी कि इन दिनों लड़कियों को नहाना नहीं चाहिए, किसी धार्मिक स्थान पर या रसोई घर में नहीं जाना चाहिए लेकिन एेसा कुछ नहीं है यह सब शारीरिक बदलाव के कारण ही होता है। इसलिए लड़कियों को अपने आप को इन दिनों में साफ सुथरा रखन चाहिए। उन्होंने उपस्थित लड़कियों को कहा कि उनके शरीर के अंगों से किसी युवा द्वारा हाथ लगाने से असुरक्षित महसूस हो तो तुरंत अपने अध्यापकों या अभिभावकों को इसकी सूचना दें। उन्होंने कहा कि अठारह साल तक में सारे बदलाव हो जाते हैं जिसके बाद किशोर को युवा माना जाता है। डा. सुखमीत बेदी ने बताया कि किशोरावस्था के ये बदलाव लड़कियों में लडक़ों की तुलना में जल्दी देखने को मिलते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि अगर आप चाहते हैं कि आप अपने बच्चों को बहुत अच्छी परविरश दें और उन्हें हर तरह से सक्षम बनाएं तो आपको कई बातों का ध्यान देना पड़ता है। अक्सर लोग ऑफिस की भागदौड़, सामाजिक सोच और अपनी पर्सनल लाइफ के चलते बच्चों पर ध्यान देना बंद कर देते हैं। जिसके चलते बच्चों की परविरश में कमी आ जाती है, जिसका ाामियाजा हमें और हमारे बच्चों को उनके किशोर होने पर भुगतना पड़ता है। उन्हें सकारात्मक सोच की किताबें पढऩे के लिए प्रेरित करें। उन पर निगरानी रखो कि टीवी या वीडियो गे स में कहीं कुछ उत्तेजित कर देने वाले नाटक आदि न देखों । साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमेशा उनसे यह जानने की कोशिश करें कि उनके मन में क्या चल रहा है या वे स्कूल में क्या करते हैं ? कोशिश करिए कि आप के बच्चों में किसी कारण उत्तेजना न पैदा हो सके।

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