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जानिए कैसे हैनरी को कमजोर कर रहे विधायक रिंकू ?

जानिए कैसे हैनरी को कमजोर कर रहे विधायक रिंकू ?

जनगाथा टाइम्स, जालंधर : सियासत में कब कौन किसको पटखनी दे दे कुछ कहा नहीं जा सकता। कभी बड़े बड़े सूरमा धराशाई हो जाते हैं तो कभी प्यादा भी वजीर को मात दे देता है। जालंधर की सियासत में भी इन दिनों कुछ ऐसी ही उठापटक चल रही है। प्यादा अब वजीर बन चुका है और वजीर को मात भी दे रहा है। जी हां कहानी बहुत दिलचस्प है और ये सूरमा कोई और नहीं बल्कि वेस्ट के विधायक सुशील कुमार रिंकू और पूर्व मंत्री अवतार हैनरी और उनके सुपुत्र और नॉर्थ के विधायक बावा हैनरी हैं।

– वेस्ट के बॉर्डर पर ही रिंकू ने रोक दिया हैनरी को 

– वेस्ट में रहने वाले हैनरी गुट के तीनों सिटिंग पारिषदों की टिकट कटी
– प्रदीप राय और विपिन आजाद लड़ रहे हैं चुनाव
– बलदेव सिंह देव नहीं रहे चुनाव लड़ने लायक
– वार्ड आरक्षित होने के बाद मेजर सिंह को वार्ड 40 से उतारा रिंकू ने

सियासत का यह खेल तभी शुरू हो चुका था जब रिंकू ने पार्षद बनने के बाद अपना अलग गुट डायनमिक के नाम से बना लिया था। रिंकू ने यहीं से हैनरी गुट को धूल चटानी शुरू कर दी थी। उस समय रिंकू गुट के अकाली भाजपा गठबंधन के कुछ आला नेताओं से बहुत अच्छॆ सम्बंध भी बन गये थे। हैनरी गुट के जगदीश राजा और रिंकू समर्थक कांग्रेस पार्षदों के दो गुट उस वक्त ही सामने आ गये थे जब कांग्रेस विपक्ष में थी। इसके बाद रिंकू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सफलता रिंकू के क़दम चूमती गई और रिंकू पार्षद से विधायक बन गये।
जालंधर वेस्ट में रिंकू का डंका तो बजने लगा लेकिन तीन पार्षद अब भी ऐसे रिंकू के क्षेत्र में थे जो पार्षद तो वेस्ट के वार्डो से थे लेकिन राग हैनरी गुट का अलापते थे। एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह रिंकू ने सब्र रखा और मौके पर चौका मारकर इन हैनरी गुट के तीनों पार्षदों का पत्ता साफ कर दिया।
इनमें पहला नम्बर डाक्टर प्रदीप राय का था। राय के वार्ड को पहले तो तीन टुकडों में बांट कर दो आरक्षित कर दिये गये फ़िर जो एक वार्ड बचा भी वहां से भी राय को कांग्रेस की टिकट नसीब नहीं हुई। अब प्रदीप राय बतौर आजाद उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। निश्चित तौर पर राय की इलाके में मजबूत पकड़ है लेकिन वह जीतने के लिये नहीं बल्कि कांग्रेस की हार के लिये मैदान में उतरे हैं। इसकी चेतावनी भी आय टिकट बंटवारे से पहले ही अखबारों में बयानबाजी कर दे चुके हैं।
दूसरा नम्बर आता है राय के मित्र और पारिषद बलदेव सिंह देव का। देव का वार्ड एससी आरक्षित हो चुका है। अब देव चुनाव मैदान से बाहर हैं। तीसरे नम्बर पर निवर्तमान पारिषद विपिन कुमार हैं। विपिन पिछली बार बतौर आजाद प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। फ़िर कांग्रेस में शामिल हो गये थे। हैनरी गुट को पूरा सपोर्ट भी करते थे। उन्हें टिकट तो मिल गयी थी लेकिन विरोध के बाद टिकट काट दी गई। अब वह भी आजाद चुनाव में उतर चुके हैं। सियासी जानकारों की मानें तो
हैनरी गुट के तीन मजबूत पत्ते साफ कर रिंकू ने अपनी ताकत दिखा दी है। साथ ही हैनरी समर्थकों को मौन संदेश भी दिया है। फिलहाल, तीनों नेता हैनरी से वफादारी की सजा पा रहे हैं। अपने समर्थकों को हक दिलाने में हैनरी नाकाम साबित हुए हैं। वहीं अपने करीबी मेजर सिंह का वार्ड आरक्षित होने के बाद भी उन्हें वार्ड नम्बर 40 से मैदान में उतारकर रिंकू ने साबित कर दिया है कि अपने समर्थकों के लिये वह कोई भी इम्तिहान पास कर सकते हैं। कैप्टन का साथ और राणा गुर्जीत सिंह का हाथ रिंकू के कद में लगातार इजाफा कर रहे हैं।
रिंकू का कद जिस तरह से दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है अगर इसी तरह से बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जालंधर में कांग्रेस की सियासत रिंकू के इर्द गिर्द घूमती नज़र आयेगी।

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