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गठिया : इलाज़ है संभव-डॉ. के.के. सिंह  

गठिया : इलाज़ है संभव-डॉ. के.के. सिंह  

जनगाथा/ हेल्थ / गठिया, जिसे आरए भी कहा जाता है, यह हमारी रोगों से लड़ने की शक्ति में समस्या होने और सूजन होने का रोग है, जिसका अर्थ है कि आपकी रोग प्रतिरोधक शकित गल्ती से स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण करने लगती है जिससे शरीर के प्रभावित अंगों में पीड़ादायक सूजन होने लगती है I गठिया का असर आम तौर पर कलाई, हाथों और घुटनों के जोड़ों पर होता है I गठिया में जोड़ों में सूजन आ जाती है और जोड़ों के ऊतकों में खराबी आ जाती है I ऊतकों में आई इस खराबी से लम्बे समय तक और तेज़ दर्द, अस्थिरता (संतुलन का आभाव) और जोड़ों की कुरूपता आ जाती है I

यह प्रणालीगत रोग है जिसका अर्थ अर्थ है कि यह शरीर के आन्तरिक अंगों हैसे हृदय,आँखों और फेफड़ों पर भी असर कर सकती है I गठिया में जब रोग बढ़ जाता है तो इसे फल्येर्स कहते हैं और जब लक्षण कुछ ठीक हो जाते हैं तो इसे रिमिशन कहते हैं I

गठिया के लक्षण:

  • एक से अधिक जोड़ों में दर्द अथवा ऐंठन
  • एक से अधिक जोड़ों में अकड़न
  • एक से अधिक जोड़ में नर्मी और सूजन
  • शरीर के दोनों ओर एक जैसे लक्षण (जैसे कि दोनों हाथों में अथवा दोनों घुटनों में)
  • भार कम होना
  • बुख़ार
  • कमज़ोरी
  • थकावट अथवा थकान

गठिया के मरीजों के अक्सर कम-से-कम दो जोड़ों में सूजन होती है जो प्राय: हाथ के छोटे जोड़ों, पांवों तथा कलाईओं में सूजन रहती है I जोड़ों में अकड़न भी रहती है जो आम तौर पर प्रात: काल होती है या कुछ समय बैठने के बाद होती है I गठिया के कारण होने वाली जोड़ों की अकड़न बाकी तरह की अकड़नों से इस लिए अलग होती है कि यह कम से कम 30 मिनट अथवा अधिक समय के लिए रहती है I गठिया के मरीजों की जोड़ों में दर्द और अकड़न के कारण कभी कभी आधी रात को भी नींद खुल जाती है I कुछ लोगों में यह दर्द बहुत हल्का रहता है और रोग नियंत्रण में रहता है किन्तु बहुत सारे लोगों को इसके कारण बहुत तीव्र दर्द होता है, बहुत सूजन, अकड़न, बहुत ज्यादा थकावट, जोड़ों को मोड़ने में मुश्किल और हिलना-जुलना मुश्किल हो जाता है I ऐसे मरीजों में रोग के लक्षणों का जल्दी पता लगने से इसका पहले पड़ाव पर ही इलाज़ किया जाना चाहिए जिस से इस रोग के लम्बे समय के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है I

गठिया शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति द्वारा अपनी स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण का ही परिणाम है I गठिया के मूल कारणों का अभी तक पता नहीं है पर कुच्छ कारणों से यह रोग होने का खतरा रहता है I

  1. आयु: हालाँकि गठिया 16 वर्ष से ऊपर किसी भी आयु के लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है फिर भी दो-तिहाई लोगों में इसके लक्षण 40 वर्ष की आयु के बाद देखने को मिलते हैं I यह लगातार काम करते रहने के कारण होता है I
  2. लिंग: गठिया के नए अध्यनों के अनुसार महिलाओं में इसके होने की सम्भावना दो-तिहाई अधिक होती है I
  3. अनुवांशिक: विशेष प्रकार के जीन के साथ पैदा हुए लोगों में गठिया विकसित होने के आसार अधिक होते हैं I ऐसे जीन, जिन्हें एचएलए (ह्यूमन लयूकोसाईट एंटीजन) श्रेणी –II जीनोटाइप्स कहा जाता है, के मौजूद होने से यह रोग ज्यादा परेशान करता है I ऐसे जीन वाले लोगों की तकलीफ़ तब और बढ़ जाती है जब ये प्रयावरण के संपर्क में आते हैं, जैसे अधिक धुयाँ आदि I
  4. धुम्रपान: अनेक अध्यनों से पता चला है कि सिगरेट पीने से गठिया रोग होने की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है और इस से रोग काफ़ी गंभीर हो सकता है I
  5. बाँझपन: ऐसी महिलाएं, जिन्होंने कभी गर्भ-धारण नहीं किया, उन्हें गठिया होने की सम्भावना अधिक रहती है I
  6. बचपन का माहौल: कई मामलों में बचपन के माहौल के कारण भी गठिया हो सकता है I उदहारण के रूप में एक अध्यन से पता चला है कि जीन बच्चों की माँ धुम्रपान करती है, उन्हें गठिया होने का दोगुना खतरा रहता है I ग़रीब परिवार के बच्चों में भी गठिया होने की सम्भावना अधिक होती है I
  7. मोटापा: मोटापे के कारण गठिया होने का खतरा बढ़ सकता है I अध्यन से पता चला है कि जितना मोटा व्यक्ति होगा, उसके गठिया होने की सम्भावना उतनी ही अधिक होगी I

रोग से सम्बंधित निदान सुविधाओं की कमी के कारण इसका पता चिकितिस्क द्वारा शारीरिक जांच, वर्गीकरण मापदंड,खून की जांच और मरीज़ द्वारा  खुद बताई गयी बातों के आधार पर किया जाता है क्यूंकि गठिया की जांच के लिए अभी तक कोई टेस्ट विकसित नहीं हुआ है I

गठिया का इलाज़ दवाओं और खुद का ध्यान रखने से संभव है I इलाज़ में दवाई डी जाती है जिससे रोग के बढ़ने की गति कम हो जाती है और जोड़ ख़राब नहीं होते I

गठिया से बचाव के उपाय:

  • शाररिक व्यायाम करें
  • चुस्त-दरुस्त रहें
  • स्वयं-प्रबंधन शिक्षा क्लास लगायें
  • धुम्रपान बंद करें
  • पौष्टिक आहार लें

 

 

 

लेखक-डॉ. के.के. सिंह     

कंसलटेंट, ओर्थपेडीक सर्जन

  अमनदीप अस्पताल, अमृतसर

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