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द ट्रिनिटी पेरैंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधीश से भेंट की

द ट्रिनिटी पेरैंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधीश से भेंट की

Hoshiarpur .
द ट्रिनिटी पेरैंट्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधान हरीश आनंद की अगुवाई में जिलाधीश अनिंदिता मित्रा से भेंट करके उन्हें ट्रिनिटी स्कूल की तरफ से फीसों व अन्य खर्च में की गई वृद्धि तथा स्कूल प्रबंधकों द्वारा जारी किए गए तुगलकी फरमान, जिसमें स्कूल द्वारा एसोसिएशन के प्रधान हरीश आनंद के बच्चों को अगले सत्र से स्कूल में दाखिला न देने की बात कही गई है, संबंधी विस्तृत जानकारी दी। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधीश ने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि वे इस मामले की जांच करवाएंगी और 15 मार्च को उन्हें दोबारा सूचित करके बुलाया जाएगा।
इस संबंधी जानकारी देते हुए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि 29 नवंबर 2016 को ट्रिनिटी स्कूल की 6 नंबर बस टांडा रोड पर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद 30 नवंबर को अभिभावकों ने एसोसिएशन का गठन किया था। इस उपरांत 15 दिसंबर 2016 को ट्रांसपोर्ट सुरक्षा संबंधी स्कूल प्रधंकों से एक कमेटी बनाने की बात की थी व लिखित भी दिया था। इस पर प्रिंसिपल ने 15 जनवरी 2017 तक इसका जवाब देने की बात कही थी। परन्तु स्कूल द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। 18 जनवरी 2017 को एसोसिएशन के चार पदाधिकारियों ने प्रिंसिपल अनीता लारैंस से भेंट की थी और उस दौरान भी प्रिंसिपल ने उनकी बातें तो सुनी पर उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। 2 फरवरी 2017 को हरीश आनंद व राजीव महाजन को स्कूल की तरफ से ‘वारनिंग लैटर’ जारी किया गया। जिसमें लिखा गया था कि पेरैंट्स एसोसिएशन संबंधी जो आपने वाट्सअप ग्रुप बनाया गया है उसे बंद किया जाए, अन्यथा आप पर कार्रवाई की जाएगी। जबकि वाट्सअप ग्रुप में स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ किसी भी तरह के अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता था, बल्कि उसमें फीस व अन्य खर्चों में की गई बढ़ौतरी की ही बातें होती थी। अभिभावकों ने बताया कि 28 फरवरी को स्कूल की तरफ से जो फीस बुक जारी की गई उसमें फीस व अन्य खर्चों में बेतहाशा बढ़ौतरी की गई थी। हालांकि अभिभावकों ने इस संबंधी बार-बार स्कूल प्रबंधकों से अपना एतराज जाहिर किया था कि फीसों में इतनी बढ़ौतरी सही नहीं है। मगर उन्हें क्या पता था कि स्कूल प्रबंधक एसोसिएशन द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे विरोध का बदला एसोसिएशन के प्रधान हरीश आनंद के बच्चों को नए सत्र से स्कूल में दाखिल न करने संबंधी नोटिस भेज कर लेंगे। उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं 7 मार्च 2017 को स्कूल ट्रांसपोर्ट द्वारा एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें लिखा गया था कि बस फीस ‘सेफ स्कूल वाहन स्कीम’ के तहत 900 से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दी गई है और 9 मार्च तक सभी अभिभावक इस नोटिस पर अपने हस्ताक्षर करके भेजें। अभिभावकों ने जिलाधीश को बताया कि स्कूल द्वारा की जा रही मनमर्जी के खिलाफ वे शांतमयी ढंग से अपना एतराज जता रहे हैं, परन्तु स्कूल प्रबंधकों द्वारा हरीश आनंद के बच्चों को स्कूल में दाखिल न करने संबंधी जारी किए गए तानाशाही फरमान ने कानून व्यवस्था व संवैधानिक अधिकारों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया है। जिसकी जांच करके स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। इस मौके पर एसोसिएशन के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावक मौजूद थे।
-ट्रिनिटी स्कूल द्वारा जारी किए गए तुगलकी फरमान और मनमर्जी से बढ़ाई गई फीसों संबंधी जानकारी देते एसोसिएशन के पदाधिकारी।
-स्कूल द्वारा हरीश आनंद के बच्चों को दिखाला न दिए जाने सबंधी जारी पत्र की कापी।

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