13 साल से खुले में पड़ा 4.5 लाख टन अनाज सड़ता रहा,अधिकारी बेखबर

    0
    50

     जनगाथा / चंडीगढ़ /  प्रदेश में लगभग 13 साल में सेंट्रल पूल का साढ़े 4 लाख टन (700 करोड़ रुपए का) अनाज सड़ गया। ऐसा एफ.सी.आई. इंस्पैक्टरों द्वारा अनाज बेचने और वजन बढ़ाने के लिए अनाज को पानी में भिगोए जाने के खुलासे के कारण हुआ। अभी पंजाब की जनसंख्या करीब 2.96 करोड़ है। यदि मान लें कि हर दिन औसतन एक व्यक्ति 500 ग्राम अनाज इस्तेमाल करता है तो पूरे पंजाब के लोगों के लिए यह करीब 30 दिन के लिए पर्याप्त था। इतने साल तक केंद्रीय खरीद एजैंसी एफसीआई के लिए पनग्रेन, पंजाब एग्रो, पनसप, मार्कफेड और पंजाब वेयरहाउसिंग कारपोरेशन नई खरीद का टारगेट पूरा करने में जुटी रहीं और पुराना अनाज सड़ता रहा।

     

    इतना ही नहीं अलग-अलग जिलों में खुले में पड़े इस अनाज की रखवाली के लिए लगाए गए चौकीदारों की तनख्वाह पर केंद्र ने 40 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। इस 4.50 लाख टन खराब अनाज में से 4 लाख टन करीब 85 करोड़ में ओपन मार्केट में 3 रुपए किलो बेचा गया। इसका उपयोग अब सिर्फ कैटल फीड में हो सकेगा। लेकिन अब भी करीब 50 हजार टन अनाज खुले में पड़ा है और उसकी रखवाली भी हो रही है।

    कुछ खरीद एजैंसियों के इंस्पैक्टरों के लालच की वजह से हजारों टन गेहूं सड़ गया। इससे आर्थिक नुकसान तो हुआ ही अन्न की बर्बादी भी हुई। रामपुरा शहर के गोदामों में 2008-09 और 2011-12, 2012-13 और 2014-15 तक भंडार किया गेहूं (सोना) मिट्टी बन गया। पनग्रेन का 2014-15 का करीब 20 हजार गट्टा गेहूं बठिंडा रोड समेत कई गोदामों में सड़ रहा है। पनसप के 9000 टन गेहूं की बोली जल्द लगने वाली है। मार्केट कमेटी के रिकार्ड के अनुसार गेहूं की खरीद 12 लाख 84 हजार 444 गट्टे हुई है जबकि धान फतेहगढ़ सा की खरीद 31 लाख 46 हजार 409 गट्टे हुई है।
    एफसीआई के लिए राज्य की एजैंसियों ने अनाज की खरीदारी की थी। लेकिन हद तो ये है कि 13 साल से इसे बेचने को लेकर केंद्र ने बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया। सूबे में भले ही अनाज का भंडारण किया गया हो लेकिन बेचने का अधिकार केंद्र के पास ही था। इस कारण अनाज सड़ता रहा। 2017 में बेचने का अधिकार राज्य को मिला। आदेश मिलते ही सरकार ने ओपन मार्केट में  3 रुपए प्रति किलो बेचने के लिए टेंडर निकाले जिसमें से 4 लाख टन बिक गया।

     

    फतेहगढ़ साहिब के गांव सदोमाजरा में खुले में पड़े अनाज की रखवाली करने वाले हाकम सिंह ने बताया कि करीब 11 साल से यहां की चौकीदारी कर रहा हूं। गेहूं की यहां 8000 से अधिक बोरियां हैं। गेहूं पूरी तरह सड़ चुका है। यहां तक कि खराब गेहूं से बारिश के दिनों में उठने वाली बदबू की मार से आसपास रहने वाले लोग भी बहुत परेशान रहते हैं। गेहूं इस कदर सड़ हुआ है कि खुले में पड़े इस गेहूं की कोई चोरी भी नहीं करता। यह अब कैटल फीड लायक भी नहीं रह गया है।

     

    परमिशन मिली तो सात माह में बेचा 4 लाख टन सेंट्रल पूल के खराब अनाज को बेचने की परमिशन सिर्फ एफसीआई को थी। 2017 में केंद्र से राज्य को खराब अनाज बेचने की परमिशन मिली तो 7 माह में 4.5 लाख टन खराब अनाज में 4 लाख टन ओपन मार्केट में कैटल फीड के लिए बेच दिया। – केएपी सिन्हा, प्रिंसिपल सेक्रेटरी फूड एंड सिविल सप्लाई पंजाब

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here