सेवा केन्द्रों के लिए दोबारा से निकलेंगे टैंडर, जरूरी प्रक्रिया हुई आरंभ

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     जनगाथा / जालंधर /  पूर्व अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार द्वारा आम जनता को उनके घर के पास ही एक ही छत के नीचे सारी सरकारी सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से खोले गए सेवा केन्द्रों का मौजूदा कांग्रेस सरकार दोबारा से टैंडर निकालने जा रही है। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है। एडीशनल चीफ सैक्रेटरी (गवर्नैंस रिफाम्र्स) की अध्यक्षता में चंडीगढ़ के अंदर हाल ही में इस संबंधी एक मीटिंग आयोजित की गई थी जिसमें एक्सप्रैशन आफ इंट्रस्ट टू आपरेट, मेनटेन एंड मैनेज सेवा केन्द्र इन पंजाब का ड्राफ्ट जारी किया गया था।

    जल्दी ही सरकार द्वारा ड्राफ्ट फाइनल करके फाइनल एक्सप्रैशन आफ इंट्रस्ट जारी किया जाएगा और टैंडर प्रक्रिया शुरू करके सेवा केन्द्र चलाने के लिए कंपनियों से बिड मांगी जाएगी। इस बार बनाए जा रहे माडल में आम जनता को बेहतर व पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना, पूरे प्रदेश में सेवाएं देने के लिए एकरूपता लाना और सारे सेवा केन्द्रों को इस तरह से चलाना जिसमें वह अपना खर्च खुद निकालकर रैवेन्यू शेयर करते हुए सरकार के ऊपर बोझ न बनें। प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले के बाद जहां पहले पूरे प्रदेश में कुल 2142 सेवा केन्द्र काम कर रहे थे अब उनकी गिनती घटकर केवल 510 रह जाएगी जिसमें 249 अर्बन सेवा केन्द्र होंगे और 261 रूरल सेवा केन्द्र होंगे।

    जी-टू-सी के साथ-साथ बी-टी-सी और बी-टू-बी सेवाएं देने का होगा प्रावधान
    मौजूदा समय में सेवा केन्द्रों के अंदर केवल जी-टू-सी (गवर्नमैंट टू सिटीजन) सेवाएं ही प्रदान की जा रही हैं, मगर नए सेवा केन्द्रों में बी-टी-सी (बिजनैस टू सिटीजन) और बी-टू-बी (बिजनैस टू बिजनैस) सेवाएं देने का भी प्रावधान रखा गया है। पहले वाले माडल में कुल 166 जी-टू-सी सर्विसिस दी जा रही हैं मगर नए माडल में 14 बी-टू-सी सर्विसिस की सूची जारी की गई है। यहां बताने लायक है कि जी-टू-सी सेवाएं केवल सरकार द्वारा ही आम जनता को प्रदान की जा सकती हैं जबकि अन्य दो सेवाएं ई-कामर्स की भांति सेवा केन्द्र चलाने वाली कंपनी द्वारा आम जनता और कारोबारियों के लिए शुरू की जा सकती हैं।

    सेवा केन्द्रों के अंदर 18 महीने में 555 करोड़ 71 लाख 96 हजार 129 रुपए की सरकारी फीस वसूली गई
    12 अगस्त, 2016 से 31 जनवरी, 2018 तक 18 महीने के कार्यकाल के दौरान पूरे प्रदेश में 22 जिलों के अंदर स्थित सेवा केन्द्रों में कुल 93 लाख 60 हजार 719 ट्रांजैंक्शंस हुईं जिससे 555 करोड़ 71 लाख 96 हजार 509 रुपए बतौर सरकारी फीस और 54 करोड़ 86 लाख 98 हजार 129 रुपए बतौर फैसीलिटेशन चार्ज के वसूले गए। सबसे अधिक ट्रांजैंक्शंस की गिनती लुधियाना में रही जहां इस समय के दौरान कुल 9 लाख 34 हजार 201 ट्रांजैंक्शंस द्वारा 54 करोड़ 2 लाख 18 हजार 829 रुपए सरकारी फीस और 5 करोड़ 73 लाख 30 हजार 818 रुपए बतौर फैसीलिटेशन चार्ज वसूले गए। सबसे कम ट्रांजैंक्शंस फतेहगढ़ साहिब में हुईं जहां कुल 1 लाख 81 हजार 46 ट्रांजैंक्शंस द्वारा 11 करोड़ 85 लाख 26 हजार 292 रुपए बतौर सरकारी फीस और 1 करोड़ 3 लाख 90 हजार 831 रुपए बतौर फैसीलिटेशन फीस वसूले गए।

    किस जोन में होंगे कितने सेवा केन्द्र?
    परिचालन के परिपे्रक्ष्य में प्रदेश को तीन जोन के अंदर बांटा गया है जिसमें कुल 22 टाइप-1, 239 टाइप-2 और 249 टाइप-3 को मिलाकर कुल 510 सेवा केन्द्र काम करेंगे। जोन-1 के अंदर 8 जिलों को शामिल किया गया है। इसमें 8 टाइप-1 सेवा केन्द्र, 97 टाइप-2 और 108 टाइप-3 सेवा केन्द्र मिलाकर कुल 213 सेवा केन्द्र होंगे। जोन-2 के अंदर 7 जिलों को शामिल किया गया है जिसमें 7 टाइप-1 सेवा केन्द्र, 85 टाइप-2 और 78 टाइप-3 सेवा केन्द्र मिलाकर कुल 170 सेवा केन्द्र खोले जाएंगे।

    31 जनवरी तक सरकार की तरफ 180 करोड़ बकाया
    जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार द्वारा निजी कंपनी को एग्रीमैंट की शर्तों के अनुसार दी जाने वाली राशि में से काफी बड़ा हिस्सा नहीं दिया गया है। 31 जनवरी, 2018 तक कंपनी का सरकार की तरफ कुल 180 करोड़ रुपए बकाया पड़ा है। 6 महीने तक सेवा केन्द्र चलाने पर सरकार की तरफ यह राशि और बढ़ जाएगी मगर सरकार द्वारा पैसे न होने की बात कह कर कंपनी का पैसा रोका जा रहा है। ऐसी सूरत में कंपनी के लिए सही ढंग से कामकाज चलाना बेहद मुश्किल साबित होने वाला है क्योंकि पहले ही स्टाफ की सैलरी देने के लिए कंपनी के प्रोमोटर्स ने अपने निजी पूल से पैसा निकालकर कंपनी के खाते में डाला है ताकि कर्मचारियों को उनकी सैलरी समय पर दी जा सके। अगर सरकार से कंपनी को पैसा समय पर नहीं मिलता है तो निजी कंपनी के लिए सेवा केन्द्र चलाना काफी मुश्किल साबित हो सकता है।

    सरकार ने 6 महीने का टर्मीनेशन नोटिस दिया है, री-टैंडर का फैसला कम्पनी स्तर पर: अंबरीश सक्सेना
    सेवा केन्द्र चलाने वाली निजी कंपनी बी.एल.एस. सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के डी.जी.एम. और इस प्रोजैक्ट के हैड आप्रेशंस अंबरीश सक्सेना ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा पिछले महीने उनकी कंपनी को कांट्रैक्ट रद्द करने संबंधी 6 महीने का टर्मीनेशन नोटिस जारी किया है जिसके तहत जुलाई, 2018 तक ही वह सेवा केन्द्र चलाएंगे। कंपनी द्वारा दोबारा से सेवा केन्द्र चलाने के लिए नया टैंडर भरा जाएगा या नहीं इसको लेकर कोई फैसला फिलहाल नहीं लिया गया है। कंपनी के उच्च-स्तर पर ही री-टैंडरिंग को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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