सिविल अस्पताल के बाहर ऑटो वालों के कारण एम्बुलैंस फंसती हैं जाम में

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     जनगाथा /जालन्धर /महानगर को यातायात जाम मुक्त करने में नाकाम साबित हो चुकी ट्रैफिक पुलिस का ध्यान शायद सिविल अस्पताल की तरफ नहीं पड़ता। रोजाना दर्जनों मरीजों को 108 की गाडिय़ां सिविल अस्पताल उपचार के लिए लाती हैं जिन्हें अस्पताल के मुख्य गेट के पास जाम में फंसना पड़ता है। इसका कारण यह है कि मुख्य गेट में ऑटो वाले गलत तरीके से ऑटो खड़े कर सवारियां उठाते हैं जिसके चलते ट्रैफिक जाम होता है और वाहनों की लम्बी कतारें लग जाती हैं। यातायात जाम सुबह 10 से लेकर शाम 7 बजे तक के बीच ही लगता है।

    गौर हो कि सिविल अस्पताल के बाहर स्थित दुकानदारों ने कई बार पुलिस अधिकारियों से अपील भी की थी कि अस्पताल के बाहर ट्रैफिक पुलिस का एक जवान तैनात किया जाए जोकि ट्रैफिक को कंट्रोल करे। कुछ दिन तक तो ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने एक पुलिस जवान अस्पताल के गेट के पास ड्यूटी के लिए लगाया था, जिसका नतीजा अच्छा निकला और ट्रैफिक जाम लगना बंद हो गया। लेकिन सूत्रों की मानी जाए तो कठिन ड्यूटी से बचने के चक्कर में उस दौरान ड्यूटी करने वाले ट्रैफिक जवान ने सिफारिश करवाकर ड्यूटी यहां से बदलवा ली। उसके बाद जो दूसरा ट्रैफिक जवान ड्यूटी करने आया, वह कुछ दिन बाद आना ही बंद हो गया। उस समय से अब तक कोई ट्रैफिक जवान यहां ड्यूटी नहीं दे रहा है। इस बात से साफ पता चलता है कि ट्रैफिक जवान कठिन ड्यूटी देने से कतराते हैं और आसान जगह पर ड्यूटी देने को तैयार रहते हैं।

    वाह री पुलिस, मैडीकल सुपरिंटैंडैंट के पत्रों का जवाब ही नहीं देती
    हमारी ट्रैफिक पुलिस कितनी गंभीरता से अपना काम करती है, इस बात का अंदाजा इस बात से ही लग जाता है कि सिविल अस्पताल के मैडीकल सुपरिंटैंडैंट डा. बावा ने कई बार पत्र लिखे कि अस्पताल के बाहर जाम हटाने के लिए एक ट्रैफिक पुलिस जवान तैनात किया जाए, लेकिन उन्हें अब तक ट्रैफिक विभाग से कोई जवाब ही नहीं मिला। डा. बावा ने बताया कि उन्होंने ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों से लेकर पुलिस कमिश्रर दफ्तर व थाना 4 की पुलिस को 3-4 बार पत्र भेजे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

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