ग्रामीण क्षेत्रों के छप्पड़ों में खड़े गंदे पानी से फैल रही बीमारियां, रहें सावधान!

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     जनगाथा /श्री मुक्तसर साहिब / सरकार द्वारा चलाई गई स्वच्छ भारत मुहिम का प्रभाव कई गांवों में दिखाई नहीं दे रहा तथा कई गांवों की दशा देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे इस मुहिम को ग्रहण लग गया हो, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के अतिरिक्त अन्य खुले स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे पड़े हैं जबकि अनेक गांवों के छप्पड़ों में खड़ा गंदा पानी का लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार जिला श्री मुक्तसर साहिब के 4 विधानसभा क्षेत्रों श्री मुक्तसर साहिब, मलोट, लम्बी व गिद्दड़बाहा के अधीन 241 के करीब गांव आते हैं तथा लगभग प्रत्येक गांव में ही छप्पड़ है।

    कुछ बड़े गांवों में छप्पड़ों की संख्या एक से ज्यादा भी है। बहुत कम गांव ऐसे हैं जहां छप्पड़ों का पानी साफ है जबकि बड़ी संख्या तो उन गांवों की ही है जहां के छप्पड़ों में गंदा पानी खड़ा है। पानी का रंग हरा व काला हो चुका है तथा इसमें से गंदी बदबू भी आती है। यदि देखा जाए तो इन ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ा गंदा व दूषित पानी इस समय कई तरह की भयानक बीमारियां को जन्म दे रहा है जोकि ङ्क्षचता का विषय है।

    कैंसर, काला पीलिया व अन्यरोगों से पीड़ित
    प्रदूषित वातावरण के कारण जिला श्री मुक्तसर साहिब के सैंकड़ों लोग पहले ही नामुराद बीमारी कैंसर, काला पीलिया, दिल की बीमारियां, गुर्दों की बीमारियां व हड्डियों की बीमारियां के कारण ईश्वर को प्यारे हो चुके हैं जबकि जिले में इन बीमारियां से पीड़ित मरीजों की संख्या अभी भी बहुत ज्यादा है जबकि दूसरी तरफ डेंगू की बीमारी ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। छप्पड़ों के निकटवर्ती घरों के लोग परेशान :छप्पड़ों के नजदीक जिन लोगों के घर हैं उनको ज्यादा ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    ऐसे लोगों का कहना है कि गंदे व बदबूदार वातावरण में रहना बहुत कठिन है परन्तु अब घर छोड़ कर कहां जाएं। लोगों ने पंचायतों के नुमाइंदों, नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों से इस मामले को लेकर फरियाद की है परन्तु किसी ने उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन जल्द से जल्द लोगों की समस्या का समाधान करे। पंचायत विभाग है चुप  गांवों की सड़कों, मार्गों सहित अन्य सरकारी व गैर सरकारी स्थानों पर लगी रूढिय़ों को उठवाना पंचायत विभाग का कार्य है परन्तु उक्त विभाग कोई कार्रवाई नहीं करवा रहा। गांवों में बनी धड़ेबंदियों के कारण भी कूड़े के ढेरों को नहीं उठाया जा रहा।

    बच्चे भी आए बीमारियों की चपेट में
    कई ऐसे गांव भी हैं जहां सरकारी स्कूल के बिल्कुल ही साथ छप्पड़ या छप्पडिय़ां हैं जिस कारण स्कूलों में आने वाले बच्चों व अध्यापकों को भी बीमारियां लगने का खतरा है। गांव लक्खेवाली, भागसर, महाबद्धर, भंगचढ़ी और रहूडिय़ांवाली आदि के स्कूल छप्पड़ों के नजदीक हैं तथा इन छप्पड़ों में गंदा पानी खड़ा है। ग्रामीण छप्पड़ों की नहीं ली सुध:भले ही सरकार ने वातावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए ‘स्वच्छ भारत ’ मुहिम शुरू की थी परन्तु लम्बा समय बीत जाने के बावजूद भी इस मुहिम अधीन गंदे पानी वाले ग्रामीण छप्पड़ों की सुध किसी ने नहीं ली।

    क्या कहते हैं स्वास्थ्य इंस्पैक्टर
    स्वास्थ्य इंस्पैक्टर भगवान दास, जिला मास मीडिया अधिकार गुरतेज सिंह ढिल्लों व सुखमन्दर सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण छप्पड़ों के खड़े पानी में काला तेल समय-समय पर डलवाया जाता है व स्प्रे करवाई जाती है।

    नालियों का गंदा पानी जा रहा छप्पड़ों में 
    जिक्र योग्य है कि कई गांवों में लोगों के घरों का गंदा पानी नालियों द्वारा छप्पड़ों में ही डाला जा रहा है जिस कारण सारा वातावरण प्रदूषित हो रहा है। प्रशासन व पंचायतों को मिलकर ग्रामीण छप्पड़ों की तरफ ध्यान देना चाहिए तथा गंदा पानी छप्पड़ों में से निकाल कर साफ पानी डाला जाए।

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