खून की होली का मामलाः6 आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर, 1 गिरफ्तार

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     जनगाथा / जालंधर / भारत नगर (चौगिट्टी) में खेली गई खून की होली में मारे गए बबलू नामक प्रवासी मजदूर पर तेजधार हथियारों से हमला करने के मामले में नामजद किए गए 3 सगे भाइयों समेत 7 आरोपियों में से पकड़े गए एक आरोपी कुलदीप कुमार पुत्र नत्थू राम निवासी यू.पी. को आज थाना रामा मंडी की पुलिस ने अदालत में पेश कर 2 दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है ताकि उक्त वारदात को लेकर उससे और पूछताछ की जा सके। एस.एच.ओ. रामा मंडी राजेश ठाकुर ने बताया है कि फरार आरोपियों रामजी शरण व रोहित समेत अन्य की तलाश में रेड की जा रही है। रामजी शरण व रोहित कुलदीप कुमार के ही सगे भाई हैं। हथियारों से लैस गुंडों के आगे भागते हुए बबलू ने रेल ट्रैक पर जाकर ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। बबलू की मौत को उसके परिजन अभी भी हत्या बता रहे हैं।

    हत्या के केस को पुलिस ने आत्महत्या में बदल डाला
    जालंधर(रविंदर शर्मा): किसी भी हत्या के मामले को पुलिस किस कदर गंभीरता से लेती है, इसका अंदाजा भारत नगर के बबलू हत्याकांड से पता चलता है। बयानकत्र्ता के साफ कहने कि बबलू को मारपीट कर रेल लाइन पर फैंका गया, के बाद भी पुलिस ने इसे हत्या की बजाय आत्महत्या करार दिया हालांकि पुलिस अधिकारियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि जब बबलू से बुरी तरह मारपीट हुई और उसे डंडों से पीटते हुए रेल लाइन की तरफ आरोपी ले गए तो फिर बबलू ने आत्महत्या क्यों की। पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई ही उलझी हुई नजर आ रही है।

    वहीं बिना जांच के डैड बॉडी को परिजनों के हवाले कर मामले को निपटाने वाली जी.आर.पी. की कार्यप्रणाली पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। होली के दिन जिस तरह से भारत नगर में खून की होली खेली गई, उस मामले में पुलिस 36 घंटे बाद तब जागी, जब परिजनों ने इसका विरोध किया क्योंकि मामला एक गरीब का था तो पुलिस की सारी भावनाएं व ड्यूटी धरी की धरी रह गई। जब विरोध शुरू हुआ तो मजबूरन कार्रवाई की तरफ कदम बढ़ाने पड़े। अपने बयान में द्वारका प्रसाद ने साफ कहा कि राम शरण, कुलदीप कुमार और रोहित ने अपने 6-7 साथियों के साथ उन पर जानलेवा हमला किया और यही लोग बबलू को डंडों से पीटते हुए रेलवे लाइन की तरफ ले गए।

    पुलिस की थ्यूरी कई तरह के सवालों के घेरे में आती है। पुलिस ने पूरे मामले में आरोपियों को बचाने की नीयत से हत्या की बजाय आत्महत्या का केस दर्ज किया जबकि पुलिस आत्महत्या के कारणों का जवाब तक नहीं दे पाई है। महत्वपूर्ण बात यह कि द्वारका प्रसाद ने अपने बयान में साफ कहा कि आरोपियों ने कमरे से 15 हजार रुपए व मोबाइल भी लूटा और यह मोबाइल फोन बाद में आरोपी राम शरण की बेटी सुजाता से बरामद भी हो गया। मगर पुलिस ने फिर आरोपियों को फायदा पहुंचाते हुए लूट की धारा की बजाय चोरी की धारा जोड़ी। कुल मिलाकर पूरे खेल में पुलिस ने अपनी मनमर्जी से कानून को तोड़-मरोड़ कर पेश किया।

    जी.आर.पी. की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में
    जी.आर.पी. की कार्यप्रणाली अक्सर ऐसे मामलों मे संदेह के घेरे में रहती है। जी.आर.पी. ने कभी भी रेलवे ट्रैक पर मिली डैड बॉडी के मामले में गंभीरता से जांच नहीं की। जी.आर.पी. का एक ही मकसद होता है कि जल्द से जल्द मामला निपटा दिया जाए और किसी जांच के पचड़े में न फंसा जाए। जिस बबलू हत्याकांड के मामले में रामामंडी थाने ने बाद में आई.पी.सी. की धारा 306, 323, 379, 148, 149 के तहत कार्रवाई की, उसे मामले में पूरी लापरवाही दिखाते हुए जी.आर.पी. ने मात्र धारा-174 की कार्रवाई करते हुए मामला निपटाने का प्रयास किया। बबलू के परिजनों ने लापरवाही दिखाने वाले जी.आर.पी. मुलाजिमों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।

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