इन 2 बैंकों ने US में मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला

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    जनगाथा / मुंबई /  पी.एन.बी. घोटाला मामले में नीरव मोदी की कंपनी के खिलाफ 2 बैंकों ने अमेरिकी अदालत से संपर्क किया है। दोनों सरकारी बैंक यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया चाहते हैं कि अदालत उनको प्रोसीडिंग्स का हिस्सा बनने की इजाजत दे। दरअसल, नीरव मोदी के मालिकाना हक वाली कंपनी फायरस्टार डायमंड ने अमेरिका में चैप्टर 11 के तहत बैंकरप्सी के लिए अप्लाई किया है। दोनों बैंकों ने अमेरिकी लॉ फर्म हिल रिकिंस के जरिए अदालत से मामले में अपना पक्ष रखने की इजाजत मांगी है। उन्होंने इस मामले में जारी किए गए नोटिस और पेपर्स की कॉपी भी मांगी है।

    अमेरिकी बैंकरप्सी कोड के चैप्टर 11 के तहत कंपनियों को कोर्ट की निगरानी में अपनी रीऑर्गनाइजेशन प्रक्रिया के दौरान क्रेडिटर्स प्रोटेक्शन दिया जाता है। प्रोसेस के तहत अगर किसी एंटिटी (इस मामले में दोनों बैंकों) को लगता है कि उस मामले में उसका कोई ‘हित’ है या ‘दावा’ निकलता है तो वह मामले में अपीयरेंस के लिए फाइल कर सकती है और अटॉर्नी के जरिए मामले में दिए गए नोटिस और संबंधित कागजात की मांग कर सकती है। इस तरह दोनों बैंक प्रोसेस से संबंधित सभी पत्राचार की कॉपी मांग रहे हैं और मामले की सुनवाई में शामिल भी होना चाहते हैं।

    नीरव मोदी का फायरस्टार डायमंड और उसकी सहयोगी कंपनियों में मेजॉरिटी स्टेक है। नीरव मोदी के खिलाफ कई इंडियन एजेंसियां पंजाब नैशनल बैंक के 13,600 करोड़ रुपए गलत तरीके से ट्रांसफर किए जाने से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। यूनियन बैंक ने बताया था कि पीएनबी फ्रॉड केस में उसका 30 करोड़ डॉलर (लगभग 1915 करोड़ रुपए) का एक्सपोजर था, लेकिन वह पूरी तरह से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग और दूसरे डॉक्युमेंट्स से पूरी तरह सिक्यॉर था और उसको अपनी पूरी रकम मिलने का भरोसा था। हालांकि बैंक ऑफ इंडिया ने यह नहीं बताया है कि इस फ्रॉड में उसका कितना एक्सपोजर है।

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