आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर शिकंजा

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    इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सफलता ही कहा जाएगा कि उनकी वॉशिंगटन यात्रा समाप्त होने के एक दिन बाद ही अमेरिका ने पाकिस्तान को दो-टूक चेतावनी दी। बीते बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में दिए अपने बहुचर्चित भाषण में मोदी ने कहा था कि आतंकवाद प्रायोजित करने वाले देशों को अलग-थलग किया जाना चाहिए। गुरुवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा – ‘अमेरिका पाकिस्तान को भारत से संबंध सुधारने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके लिए आवश्यक कदमों में एक यह है कि पाकिस्तान यह सुनिश्चित करे कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ हमलों की योजना बनाने के लिए नहीं होने देगा।” टोनर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपनी भूमि पर सक्रिय सभी आतंकी गुटों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

    यह वाक्य इस संदर्भ में अहम है कि पाकिस्तान ने दहशतगर्द गिरोहों के मामले में दोहरा रुख अपनाए रखा है। उसने पाकिस्तानी ठिकानों पर हमले करने वाले समूहों को तो निशाना बनाया है, लेकिन आज भी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत विरोधी गुटों को पनाह दे रखी है। संभवत: इसी तरफ इशारा करते हुए अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद से एक स्वर में लड़ा जाना चाहिए।

    स्पष्ट है कि अब अमेरिका ने भारत के इस तर्क को स्वीकार किया है। लश्कर ने नवंबर 2008 में मुंबई पर और जैश ने इस वर्ष जनवरी में पठानकोट स्थित भारतीय वायुसेना के अड्डे पर हमला किया। दोनों आतंकी कार्रवाइयों की पाकिस्तान में साजिश रची गई। बल्कि उन्हें वहीं से संचालित भी किया गया। ये ऐसे तथ्य हैं, जिन्हें आज दुनिया स्वीकार कर चुकी है। यहां तक कि पाकिस्तान के खैरख्वाह चीन में भी पिछले दिनों सरकारी टेलीविजन पर मुंबई जनसंहार नामक वृत्तचित्र दिखाया गया। इसमें 26/11के हमले में पाकिस्तान स्थित गुटों की भूमिका का विस्तार से जिक्र हुआ। हालांकि बाद में चीनी विदेश मंत्रालय ने सफाई दी कि इस प्रसारण का अर्थ 26/11 पर चीन की नीति में बदलाव नहीं माना जाना चाहिए (चीन ने अभी तक मुंबई हमले में पाकिस्तान का हाथ होने की बात नहीं मानी है), मगर इससे यह तो जाहिर हुआ कि घोर कूटनीतिक स्वार्थ से प्रेरित देश भी सच को हमेशा छिपाए नहीं रख सकते।

    सच्चाई साबित होने के बाद कार्रवाई का सवाल सामने आता है। चूंकि पाकिस्तान सरकार भारत विरोधी गुटों के खिलाफ कदम उठाने को तैयार नहीं है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपेक्षित है कि वह पाकिस्तान पर शिकंजा कसे। नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सामने यही मांग रखी। उनकी शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में इस मुद्दे का उल्लेख हुआ। उसके मुताबिक दोनों नेताओं ने मुंबई (2008) और पठानकोट (2016) हमलों के षड्यंत्रकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने की अपील पाकिस्तान से की। उसके बाद अमेरिका ने खुली चेतावनी दी। यह संकेत है कि अब पाकिस्तान पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकता। सीमापार आतंकवाद प्रायोजित करने के मामलों में उसे जवाबदेह बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब कमर कस रहा है।

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